दीपक मिश्रा बने देश के चीफ जस्टिस, दिल्ली गैंगरेप के चार अभियुक्तों को सुना चुके है फांसी की सजा

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दीपक मिश्रा ने आज देश के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली. वे भारत के 45वें चीफ जस्टिस बने हैं. वे देश के 21 चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्र के भतीजे हैं. दीपक मिश्रा ने चीफ जस्टिस जे एस खेहर की जगह ली. जस्टिस खेहर का सेवाकाल समाप्त हो गया है. जस्टिस दीपक मिश्रा पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. देश के चीफ जस्टिस के रूप में उनका कार्यकाल 28 अगस्त 2017 से दो अक्टूबर 2018 तक होगा. दीपक मिश्रा का जन्म तीन अक्टूबर 1953 को हुआ है.
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दीपक मिश्रा ने वर्ष 1977 में ओड़िशा हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था और वकालत शुरू की थी. वे 1996 में ओड़िशा उच्च न्यायालय के अपर न्यायाधीश बने थे. 1997 में उन्हें जज बनाकर मध्यप्रदेश भेज दिया गया. वर्ष 2009 में वे पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने और मई 2010 तक वे इस पद पर रहे. वे दिल्ली हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस भी रहे. वर्ष 2011 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज बना दिया गया.
कुछ प्रमुख फैसले :
1. जस्टिस मिश्रा ने दिल्ली पुलिस को यह निर्देश दिया था कि वह ऐसी व्यवस्था करे कि प्राथमिकी दर्ज होने के 24 घंटे के अंदर वेबसाइट पर एफआईआर अपलोड करे.
2. पदोन्नति में आरक्षण के मामले में जस्टिस मिश्रा और न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा कि पदोन्नति में आरक्षण केवल तभी प्रदान किया जा सकता है जब पर्याप्त डेटा और जरूरतों का औचित्य सिद्ध करने के लिए साक्ष्य हों.
3. न्यायमूर्ति मिश्रा की अगुवाई में तीन न्यायाधीशों की बेंच ने 5 मई, 2017 को निर्भया बलात्कार मामले के चार अभियुक्तों को मौत की सजा सुनायी.

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