शरद यादव की सदस्यता खत्म करने के लिए उपराष्ट्रपति से मिले जदयू नेता

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पटना
बागी नेता शरद यादव की राज्‍यसभा की सदस्‍यता खत्‍म करवाने के लिए जदयू नेता आसीपी सिंह और एसके झा ने उपराष्‍ट्रपति वैंकेया नायडू से मिलकर मेमोरेंडम सौंपा। शरद यादव की सदस्यता समाप्त किए जाने की मांग की। बता दें कि महागठबंधन टूटने के बाद से ही शरद यादव नीतीश कुमार से नाराज चल रहे थे। धीरे-धीरे उन्‍होंने अपना बागी तेवर दिखाना शुरू कर दिया। जदयू दो गुटों में बंट गया। एक नीतीश समर्थित गुट और दूसरा शरद समर्थित गुट। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्‍व में हुई राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के समय शरद यादव ने उसके समानांतर पटना के श्रीकृष्‍ण मेमोरियल हॉल में कार्यक्रम किया था, जिसमें उनके साथ राज्‍ससभा सांसद अली अनवर, पूर्व मंत्री रमई राम सहित कई नेता श‍ामिल हुए थे।
शरद यहीं नहीं रूके, पार्टी की ओर से मना किये जाने के बावजूद 27 अगस्‍त को लालू प्रसाद यादव द्वारा भाजपा भगाओ देश बचाओ रैली में मंचासीन हुए। इसके बाद से जदयू की ओर से शरद यादव पर कार्रवाई करने की कवायद तेज हो गई। हालांकि, इससे पहले राज्यसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर शरद यादव ने जेडीयू की कोशिशों का विरोध किया है। बिहार के मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहने को ही अब शरद यादव ने चुनौती दे दी है।

शरद यादव ने इस बाबत लोकसभा में जेडीयू के सांसद कौशलेंद्र को पत्र लिखा है और इसके साथ ही उन्होंने राज्य सभा के सभापति वेंकैया नायडू को भी पत्र लिखा है। शरद के इस पत्र को लेकर जेडीयू ने भी उनपर हमला बोला है। इस पर शरद यादव ने कहा कि इस तरह का पत्र लिखना न तो कौशलेंद्र कुमार के अधिकार क्षेत्र में आता है और न ही वे इसके लिए प्राधिकृत हैं। शरद यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार ने खुद ही भाजपा के साथ सरकार बनाकर पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र और बुनियादी सिद्धांतों को त्यागकर स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। शरद यादव ने कहा है कि चुनाव आयोग के आदेश 1968 के पैरा 15 के तहत आयोग से 25 अगस्त को आग्रह किया गया है कि पार्टी का बहुमत उनके साथ है इसलिए पार्टी का चुनाव चिन्ह उन्हें दिया जाए। इस मामले पर आयोग का फैसला आना बाकी है।

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