नीतीश से शरद की नाराजगी का यह है असली कारण, जदयू पर कब्जे की लड़ाई में फंसा एफिडेविट का पेंच

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पटना : बिहार में एक राष्ट्रीय पार्टी और एक सत्ताधारी पार्टी जदयू दोनों में इन दिनों घमसान मचा हुआ है. राष्ट्रीय पार्टी में आपसी भितरघात और कलह के साथ बगावत की बानगी देखने को मिल रही है. वहीं, दूसरी ओर जदयू में लड़ाई असली और नकली के साथ पार्टी के सिंबल पर कब्जे की है. शुक्रवार को जदयू पर अपने अधिकार को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के गुट ने चुनाव आयोग से मुलाकात की और अपना दावा पेश किया. सवाल यह उठता है कि पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक शरद यादव अचानक बागी कैसे हो गये. इस सवाल का जवाब आपको अब मिल जायेगा. शरद यादव के लालू खेमे में जाने और नीतीश कुमार से दूरी की मुख्य वजह अब जाकर सामने आयी है. इस वजह को जानकर आप हैरान होंगे, वहीं यह भी कहेंगे कि आखिर पार्टी के इतने बड़े शीर्ष नेता से कम्यूनिकेशन गैप कैसे हो गया. शरद यादव के बारे में कहा जा रहा है कि उनकी नाराजगी की मुख्य वजह यह है कि पार्टी के नेताओं और स्वयं नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ जाने के अपने निर्णय के बारे में उन्हें भनक तक नहीं लगने दी. नीतीश कुमार को करीब से जानने वाले राजनीतिक पंडितों ने मीडिया में यह बयान दिया है कि भाजपा के साथ जाने के निर्णय के साथ लालू और शरद दोनों से राजनीतिक रिश्ता न के बराबर रखने का फैसला जदयू ने कर लिया था.

बढ़ती गयी दूरी

अब सवाल उठता है कि शरद दुखी हैं, तो नीतीश कुमार भी कई कारणों से शरद यादव से नाखुश चल रहे हैं. जिसमें जीतन राम मांझी प्रकरण में नीतीश का शरद द्वारा खुलकर विरोध किया जाना और लालू के साथ मिलकर अंदर ही अंदर रणनीति तय करना. शरद से नीतीश के नाराज होने का एक और कारण है कि पार्टी प्रवक्ताओं द्वारा इशारों-इशारों में मीडिया के जरिए लालू के साथ असहज गठबंधन की बात शरद यादव तक जाती थी, जिसे वह दरकिनार करते रहे. शरद यादव ने एक बार भी अपनी बात पार्टी फोरम पर उठाने की वजाए, सार्वजनिक रूप से बयान देकर मीडिया के सामने रखा. शरद यादव चाहते, तो पार्टी नेताओं की बैठक बुलाकर अपनी बात कह सकते थे. उधर, शरद गुट का कहना है कि पार्टी के कुछ नेता शरद यादव को शुरू से ही दरकिनाकर कर चल रहे थे और उन्हें किसी बात की जानकारी नहीं दी जाती थी. इन सभी मामलों के बीच, जो मुख्य कारण उभरकर सामने आया है, वह यह कि इतने बड़े फैसले लेने से पहले एक बार भी शरद यादव से पूछना जरूरी नहीं समझा गया.

चुनाव आयोग पहुंचा है मामला

इससे पूर्व केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए में जदयू के शामिल होने का विरोध कर रहे पार्टी के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव की अगुवाई वाले असंतुष्ट गुट द्वारा पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाये जाने के बीच नीतीश गुट ने शुक्रवार को निवार्चन आयोग की शरण ली. जद यू संसदीय दल के नेता आर सी पी सिंह और पार्टी महासचिव के सी त्यागी ने चुनाव आयोग में जदयू के वरिष्ठ पदाधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की ओर से शपथपत्र पेश किया. त्यागी ने शपथपत्र में जदयू के 71 विधायकों, 30 विधान पार्षदों और लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों के नीतीश कुमार के प्रति समर्थन होने का दावा किया है. इसके अलावा जदयू के 20 में से 16 केंद्रीय पदाधिकारियों, 16 प्रदेश अध्यक्षों 180 सदस्यीय राष्ट्रीय परिषद के 143 सदस्यों ने भी नीतीश के समर्थन में शपथपत्र दिये हैं. त्यागी ने आयोग से पार्टी के चुनाव चिह्न पर शरद यादव गुट के दावे को खारिज करने की मांग करते हुए इस मामले में यथाशीघ्र फैसला करने का अनुरोध किया. पार्टी के दस राज्यसभा सदस्यों में से सांसद वीरेंद्र कुमार ने दोनों गुटों से समान दूरी बनायी है, जबकि अली अनवर पहले ही शरद यादव गुट का समर्थन कर चुके हैं.

शरद गुट कर रहा अलग दावा

इस बीच शरद यादव गुट की ओर से जदयू के महासचिव अरुण कुमार श्रीवास्तव ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि आगामी 17 सितंबर को दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी. उन्होंने कहा कि 18 सितंबर को होने वाली जदयू राष्ट्रीय परिषद की बैठक स्थगित कर अब इसे आठ अक्तूबर को आहूत करने का फैसला किया गया है. इन बैठकों के बारे में पूछे जाने पर त्यागी ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक आहूत करने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष को होता है. त्यागी ने आरोप लगाया कि शरद गुट जानबूझ कर इस मामले को आयोग में ले जाने की कोशिश कर रहा है जिससे यादव राज्यसभा के सभापति से यह मामला आयोग में विचाराधीन होने के आधार पर उनकी सदस्यता रद्द करने के आवेदन पर कार्रवाई नहीं करने की मांग कर सकें. जदयू ने सभापति से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आधार पर यादव की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है. चुनाव आयोग से पार्टी के चुनाव चिह्न पर शरद यादव के दावे को खारिज करने की नीतीश कुमार गुट की मांग के बारे में श्रीवास्तव ने कहा कि नीतीश गुट के साथ भले ही विधायक और सांसद हों लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी और प्रदेश इकाइयां शरद यादव के साथ हैं.

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