राम रहीम के खिलाफ चल रहे हत्या मामले में खट्टा सिंह गवाही देने को तैयार

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छत्रपति व रणजीत हत्याकांड में आज गुरमीत राम रहीम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेश हुआ। मामले की अगली सुनवाई २२ सितंबर को होगी।

जेएनएन, चंडीगढ़। पत्रकार छत्रपति साहू और डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या मामलों में पंचकूला सीबीआइ कोर्ट में गुरमीत राम रहीम को शनिवार को रोहतक की सुनारिया जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। मामले में सीबीआइ वकील एचपीएस वर्मा और बचाव पक्ष के वकील एसके गर्ग के बीच बहस हुई। इस बीच, मामले में डेरे का पूर्व सेवादार खट्टा सिंह फिर से राम रहीम के खिलाफ गवाही देने को तैयार हो गया है। खट्टा सिंह ने गवाही देने के लिए कोर्ट में अपील दायर की है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 22 सितंबर तक टाल दी है। उसी दिन कोर्ट तय करेगा कि खट्टा सिंह को गवाही देनी है या नहीं।

आज दोनों हत्याओं के मामले में सात अन्य आरोपी निर्मल सिंह, कृष्ण लाल, कुलदीप, अवतार सिंह, जसबीर, सबदिल और इन्द्रसेन को भी अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के मद्देनजर रोहतक, पंचकूला सहित राज्यभर में सुरक्षा कड़ी रही। रोहतक में सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन द्वारा 15 ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। साथ ही अर्धसैनिक और पुलिस के जवान पेशी के दौरान संदिग्ध लोगों पर विशेष नजर रख रहे हैं।

बता दें, पत्रकार छत्रपति और डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या मामलों में आज फाइनल बहस हुई। रोहतक जेल में यह पहला मौका था जब किसी कैदी की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरियाणा के नए गृह सचिव एसएस प्रसाद, पुलिस महानिदेशक बीएस संधू, चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक और पंजाब के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ बैठक की।
पंचकूला सीबीआइ कोर्ट के बाहर तैनात पुलिस बल।

गृह सचिव व डीजीपी ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए कदमों की जानकारी दी। राज्य में अभी 33 कंपनियां अद्र्धसैनिक बलों की तैनात हैैं। गुरमीत राम रहीम की पेशी के बाद फिर से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी। उसके बाद पंचकूला, सिरसा और रोहतक जिलों को छोड़कर बाकी जिलों से अद्र्धसैनिक बलों की कंपनियों को वापस भेजा जा सकता है।

रणजीत व छत्रपति मर्डर केस भी 15 साल पुराने

10 जुलाई 2002 को डेरे की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत का मर्डर हुआ था। डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत ने साध्वी यौन शोषण की गुमनाम चिट्ठी अपनी बहन से ही लिखवाई थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत के पिता ने जनवरी 2003 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की। वहीं 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा के सांध्य दैनिक ‘पूरा सचÓ के संपादक रामचंद्र छत्रपति को पांच गोलियां मारी गई थी, जिसके बाद 21 नवंबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मृत्यु हो गई।

बताया जाता है कि अपने अखबार में साध्वी यौन शोषण मामले को उठाने पर ही रामचंद्र छत्रपति की हत्या की गई। जनवरी 2003 में पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की। इसके बाद हाई कोर्ट ने पत्रकार छत्रपति व रणजीत हत्याकांड की सुनवाई एक साथ करते हुए 10 नवंबर 2003 को सीबीआइ को एफआइआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए। दिसंबर 2003 में सीबीआइ ने छत्रपति व रणजीत हत्याकांड में जांच शुरू की। डेरे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच पर रोक की मांग की। नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने डेरे की याचिका खारिज कर दी।

पंचकूला में पैरामिलिट्री व पुलिस तैनात

गुरमीत राम रहीम की पेशी भले ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई, लेकिन पंचकूला स्थित सीबीआइ कोर्ट की सुरक्षा कड़ी रही। पंचकूला कोर्ट में हरियाणा पुलिस और पैरामिलिट्री को तैनात किया गया है। राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में सजा सुनाने वाले जज जगदीप सिंह ने ही रणजीत सिंह व रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड की सुनवाई की।

कानून तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई

रोहतक के एसपी पंकज नैन ने कहा कि गुरमीत राम रहीम की पेशी को देखते हुए सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। अगर किसी भी व्यक्ति ने कानून तोडऩे का प्रयास किया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिले की सभी सीमाओं पर वाहनों की जांच के साथ-साथ संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी शुरू कर दी है।

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