ब्रह्मपुत्र के डेटा पर भारत को धोखा दे रहा है चीन?

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भारत और चीन के बीच कई महीनों तक चला डोकलाम विवाद भले ही खत्म हो गया है, लेकिन अब भी दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हो पाए हैं। अब दोनों के बीच अगला विवाद पानी को लेकर शुरू हो सकता है। भारत ने कहा है कि समझौते के बावजूद चीन ने अभी तक उसे ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़े डेटा नहीं दिए हैं। चीन का कहना है कि कुछ तकनीकी कारणों से वह यह डेटा नहीं दे पा रहा है, लेकिन इस बीच बांग्लादेश का कहना है कि उसे चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी के जल स्तर से जुड़ी जानकारी इस मॉनसून के दौरान भी दी है।

बीबीसी की एक खबर के मुताबिक चीन अब भी बांग्लादेश से ब्रह्मपुत्र नदी की जानकारी साझा कर रहा है। एशियाकी सबसे बड़ी नदियों में से एक ब्रह्मपुत्र तिब्बत से निकलते हुए भारत आती है और यहां से वह बांग्लादेश जाकर गंगा में मिलती है। इसके बाद यह नदी बंगाल की खाड़ी से मिल जाती है।

पिछले हफ्ते ही चीन ने यह कहा था कि वह फिलहाल ब्रह्मपुत्र नदी का जलीय आंकड़ा भारत के साथ साझा नहीं कर सकता क्योंकि तिब्बत के हाइड्रलॉजिकल स्टेशनंस अपग्रेड किए गए हैं। चीन और भारत के बीच डोकलाम विवाद खत्म होते ही यह मामला सामने आ गया था।

हर साल ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर बढ़ने की वजह से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश में बाढ़ की स्थिति पैदा होने से काफी नुकसान झेलना पड़ता है। भारत-चीन के समझौते के तहत चीन को 15 मई-15 अक्टूबर के बाढ़ के सीजन के दौरान सतलुज और ब्रह्मपुत्र नदियों पर जलीय आंकड़े साझा करने होते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बीते महीने एक प्रेस ब्रीफ में बताया था कि इस साल 15 मई के बाद से चीन ने कोई हाइड्रलॉजिकल डेटा शेयर नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा था कि इसके पीछे के तकनीकी कारणों के बारे में नहीं पता लेकिन एक ऐसी व्यवस्था बनी हुई जिसके तहत चीन को हमे हाइड्रलॉजिकल डेटा देना होता है। चीन ने बीते हफ्ते इसके पीछे तकनीकी दिक्कत को वजह बताया।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा था, ‘बीते साल बाढ़ की वजह से हुई क्षति के बाद मरम्मत कार्य और तकनीकी कारणों की वजहों से हाइड्रलॉजिकल डेटा शेयर नहीं किए जा सके।’ लेकिन बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक चीन अभी भी उनसे जल स्तर और पानी छोड़ने जैसी जानकारियां साझा कर रहा है।

बांग्लादेश के जॉइंट रिवर्स कमिशन के सदस्य मोफज़ल हुसैन ने बताया कि चीन ने कुछ दिन पहले भी जल स्तर से जुड़ी जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें साल 2002 से तिब्बत के तीन हाइड्रलॉजिकल स्टेशनों से ये डेटा मिल रहे हैं और चीन ने इस मॉनसून में भी जानकारी साझा की हैं।’ बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री अनिसुल इस्लाम मोहम्मद ने भी चीन से डेटा मिलने की पुष्टि की है। लेकिन चीन ने भारत को दिए जाने वाले डेटा को लेकर अभी भी अनिश्चितता जैसी स्थिति बनाई हुई है।

रवीश कुमार ने प्रेस ब्रीफ के दौरान यह भी कहा था कि अगर चीन ने डेटा साझा किए होते इस साल असम और बिहार में आई बाढ़ से निपटने में मदद मिलती। साथ ही डेटा शेयर न करना 2013 में हुए समझौते का उल्लंघन भी है।

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