अपराधी साबित होते ही सांसदों, विधायकों को अयोग्य न माना जाए: केंद्र

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केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि किसी आपराधिक मामले में दोषी पाए गए सांसद और विधायक अपने आप अयोग्य नहीं होंगे और उन्हें खुद को दोषी ठहराए जाने के फैसले के खिलाफ अपील करने और उस पर रोक हासिल करने का एक मौका मिलना चाहिए ताकि वे अपने पद पर बने रह सकें।

2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस मामले में दोषी ठहराए जाने पर खुद ब खुद अयोग्य होने से जुड़ा फैसला देने के बाद से कुछ सांसदों और विधायकों को अपनी कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।इससे पहले तक, निर्वाचित सांसद और विधायक दोषी ठहराए जाने के बाद अपनी अपील की सुनवाई होने तक पद पर बने रह सकते थे। हालांकि, हाल के समय में इस तरह के पदों पर बैठे कुछ लोगों ने दोषी ठहराए जाने के बाद भी इस्तीफा देने से मना कर दिया था।

एनजीओ लोक प्रहरी ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान खींचा था। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इन आरोपों का जवाब देने के लिए कहा था। सरकार ने अपने जवाब में दावा किया कि एक निर्वाचित सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद अपनी कुर्सी छोड़ने की जरूरत नहीं है। सरकार ने सुझाव दिया कि दोषी पाए गए सांसद या विधायक को इसके खिलाफ संबंधित अदालत में अपील करने और अपने पद पर बने रहने की अनुमति होनी चाहिए।

लिली थॉमस मामले में फैसले का मतलब किसी व्यक्ति के दोषी पाए जाने पर खुद ब खुद उसका अयोग्य होना था, चाहे उसे बाद में सुप्रीम कोर्ट से बरी कर दिया जाए। चुनाव आयोग इसके बाद उस सीट को खाली घोषित करेगा और उसे भरने के लिए नया चुनाव कराया जाएगा। अब केंद्र सरकार ने इस फैसले को पलटने की मांग करते हुए दावा किया है कि दोषी पाए गए सांसद या विधायक को अदालत में अपील करने और उसके खिलाफ फैसले पर रोक हासिल करने का अधिकार है।लॉ मिनिस्ट्री के हलफनामे में दावा किया गया है कि अपराधियों को चुनावी मैदान में उतरने से रोकने और चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता को बरकरार रखने के लिए संविधान में पर्याप्त प्रावधान हैं। एनजीओ लोक प्रहरी ने अपने सेक्रटरी एस एन शुक्ला के जरिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अपील में शिकायत की थी कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए कुछ विधायक अभी भी अपने सदनों में बरकरार हैं। इन विधायकों की दलील है कि विधानसभा के सचिवालय ने उनकी अयोग्यता की आधिकारिक सूचना नहीं दी है।

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