कन्या विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करती मां कात्यायनी

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शारदीय नवरात्र का मंगलवार को छठा दिन है। इस दिन आदिशक्ति देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इसी स्वरूप में महिषासुर दानव का वध किया था। इसलिए मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लाल रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए। इस दिन लाल रंग का वस्त्र शुभ माना जाता है।

इस दिन शास्त्रों के मुताबिक, जो भक्त मां कात्यायनी की उपासना करते हैं, उनके जीवन में आने वाली बाधाएं स्वत: ही खत्म हो जाती हैं। अगर किसी कन्या के विवाह में बाधा आ रही हो तो उसे मां कात्यायनी का व्रत और पूजन करना चाहिए। ऐसा करने से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

ऐसे पड़ा कात्यायनी नाम

महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की आराधना करते हुए बहुत वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली और पुत्री रूप में जन्म लिया। इसीलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा।

शहद है प्रिय

मां कात्यायनी ने देवताओं के कष्ट हरने के लिए महिषासुर से युद्ध किया। युद्ध के दौरान हुई थकान को मिटाने के लिए मां ने शहद युक्त पान का सेवन किया इसलिए मां कात्यायनी के पूजन में शहदयुक्त पान अर्पित किया जाता है।

मां कात्यायनी का मंत्र

चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

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