जब गुजरात के सीएम को पाकिस्तानी फाइटर प्लेन ने निशाना बनाकर मार डाला

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गुजरात चुनाव में जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही हैं वैसे-वैसे सियासी पार्टियों की सोशल मीडिया टीमें नए-नए तरीकों से युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित करने में जुटीं हैं. बता दें कि गुजरात में 9 और 14 दिसंबर को वोटिंग होनी है. राज्य की सत्ता से 22 साल का सूखा झेल रही कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया टीम ट्विटर पर पार्टी के फेवर में मौहाल बनाने के लिए लगातार नए-नए हैशटैग से सवाल जवाब किए जा रहे है. कांग्रेस पार्टी ने गुजरात में युवाओं को उनकी धरोहर से अवगत कराने के लिए #KnowYourLegacy नाम से सवाल-जवाब का एक सर्वे चलाया है. इसी के तहत पार्टी पूर्व में कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्रियों द्वारा किए गए कामों को गिनाने में जुटी है. एक सवाल में कांग्रेस ने पूछा था कि गुजरात के किस मुख्यमंत्री को पंचायती राज का शिल्पकार (Architect) माना जाता है

इस सवाल के साथ कांग्रेस ने लोगों के सामने 4 विकल्प दिए थे. जिनमें आनंदीबेन पटेल, केशुभाई पटेल, बलवंत राय मेहता और नरेंद्र मोदी का नाम शामिल था. सबसे ज्यादा लोगों का जवाब आया बलवंत राय मेहता. यह जवाब सही भी है, बलवंत राय मेहता गुजरात के दूसरे मुख्यमंत्री थे. मेहता जून 1963 से लेकर सितंबर 1965 तक गुजरात के सीएम थे. बलवंत राय मेहता को लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में उनके योगदान के लिए उन्हें पंचायती राज का वास्तुकार माना जाता है. बलवंत राय मेहता मुख्यमंत्री रहते हुए ही दुश्मन के विमान द्वारा किए गए हमले में मारे गए थे. जिस वक्त भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बनी हुई थी उसी वक्त पाकिस्तान की सीमा के पास सीएम के विमान को दुश्मन के फाइटर प्लेन ने निशाना बना कर उड़ा दिया था. पाकिस्तान की इस कायराना हरकत में 8 लोगों की मौत हुई थी.

दरअसल 19 सितंबर 1965 को तत्कालीन सीएम बलवंत राय मेहता राज्य के कच्छ के दौरे पर थे. मेहता के साथ उनकी पत्नी सरोज बेन, स्टाफ के तीन सदस्य, एक पत्रकार और दो क्रू मेंबर भी शामिल थे. मीठापुर से कच्छ के लिए सीएम के विमान ने जैसे ही उड़ान भरी वैसे ही उसे पाकिस्तान के फाइटर पायलेट कैस हुसैन ने इंटरसेप्ट किया और उसे घेर लिया. पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को देखते हुए बीचक्राफ्ट ने अपने पंखे हिलाने शुरू कर दिए. यह दया और छोड़ दिए जाने का इशारा था. गुजरात सरकार के मुख्य पायलट जहांगीर एम. इंजीनियर उड़ा रहे थे. इंजीनियर भारतीय वायुसेना में पायलट और सह पायलट के रूप में अपनी सेवा दे चुके थे.

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