बड़ा फैसला: पुराने नियमों से बालू की बंदोबस्‍ती करेगी बिहार सरकार

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बिहार में बालू संकट अब कुछ ही दिनों में खत्‍म हो जायेगा। सरकार पुराने नियमों से बालू की बंदोबस्‍ती करने को तैयार हो गई है।
पटना। सूबे में बालू संकट के समाधान के लिए राज्य सरकार ने नए सिरे से पहल शुरू कर दी है। बुधवार की देर शाम राज्य सरकार ने बालू को लेकर इसके बंदोबस्तधारियों और सरकार के बीच चल रही तनातनी को समाप्त करने की पहल की है।

इसके लिए राज्य के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह स्वयं सामने आए और करीब छह महीने से व्याप्त गतिरोध को समाप्त करने की पहल की। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि लघु खनिजों के अवैध खनन के खिलाफ सरकार की कार्रवाई जारी रहेगी। अवैध खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि जिन बालू घाटों की बंदोबस्ती विभाग ने पिछले दिनों रद कर दी थी, उन घाटों की बंदोबस्ती शीघ्र ही फिर बहाल कर दी जाएगी। लेकिन इस बार किसी भी बंदोबस्तधारी को एक सौ हेक्टेयर से अधिक के रकबे से बालू खोदाई की इजाजत नहीं होगी।

हालांकि यह मामला अभी भी पटना हाइकोर्ट में लंबित है। लेकिन सरकार की इस पहल से राज्य में पिछले छह महीने से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होने के संकेत मिलने लगे हैं। मुख्य सचिव ने बुधवार की देर शाम एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर कहा कि राज्य के सभी जिलों में बालू का संकट नहीं है। पटना, भोजपुर व सारण में ही इसका सर्वाधिक संकट है। सरकार इस संकट को दूर करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य में अब बालू का कारोबार पुरानी नियमावली के तहत ही किया जाएगा। जिसमें बालू की कीमत तय सरकार नहीं, बल्कि बाजार की प्रतिस्पर्धा के आधार पर तय की जाएंगी। बालू खनन को लेकर पुरानी नियमावली के तहत खान एवं भूतत्व विभाग और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की बंदिशें लागू रहेंगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि बालू खनन के जिन बंदोबस्तधारियों के पास पहले से सौ हेक्टेयर से अधिक के रकबे से बालू खनन का लाइसेंस है, वे अपना कार्य पूर्ववत ही करते रहेंगे। लेकिन यदि उनके खिलाफ किसी तरह की शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि बालू का उठाव और परिवहन ई-चालान के माध्यम से ही किया जाएगा। बिना ई-चालान के बालू का उठाव नहीं किया सकता। बता दें कि सरकार ने बालू के अवैध खनन, परिवहन, भंडारण व खरीद-बिक्री को समाप्त करने के उददेश्य से राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों की सहमति से नई बालू नीति बनाई थी।

इस नई नीति के तहत ही सरकार ने बिहार लघु खनिज नियमावली, 2017 तैयार की थी। जिसे लागू किए जाने के खिलाफ बालू बंदोबस्तधारियों ने पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर कर नई नियमावली को लागू किए जाने को चुनौती दी है। इस मामले में पटना हाइकोर्ट में सुनवाई जारी है और सुनवाई की अगली तिथि 23 जनवरी निर्धारित की गई है।

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