बिहार में सियासत के बदलते रंग- मकर संक्रांति के उस ‘तिलक’ से इस ‘तलाक’ तक…

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लालू प्रसाद ने पिछले साल मकर संक्रांति के भोज में नीतीश को बुरी नजरों से बचाने के लिए दही का तिलक लगाया था। लेकिन, आज लालू व नीतीश में ‘तलाक’ है और फिर संक्रांति‍ नजदीक है।
पटना । राजनीति कब किस करवट बैठेगी ये कोई नहीं जानता। राजनीति में कब कौन किसका साथ छोड़ेगा, कौन किसके साथ जाएगा, यह तय नहीं होता। बिहार में भी भाजपा के खिलाफ बने ‘महागठबंधन’ के साथ ऐसा ही हुआ। केवल एक साल आठ महीने चली इस दोस्‍ती के दौरान पिछले मकर संक्रांति के दिन दही का तिलक लगाकर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को बुरी नजरों से बचाने कर एलान करने वाले लालू आज जेल में हैं। मकर संक्रांति का त्योहार फिर नजदीक है, लेकिन इस बार लालू व नीतीश के बीच ‘तिलक’ नहीं, ‘तलाक’ का माहौल है।
दोस्त बदल गए, रिश्ते बदल गए और समय बदल गया। लालू यादव की पार्टी राजद पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतकर बिहार के सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। जदयू कांग्रेस का साथ पाकर उसने बिहार में महागठबंधन की सरकार बनाई। लेकिन, लालू चारा घोटाला में सजा मिलने के बाद लालू अाज जेल की सलाखों के पीछे हैं। इधर, कभी एक सुर में गाने वाली लालू व नीतीश की पार्टियां (जदयू व राजद) एक-दूसरे के खिलाफ आग उगल रही हैं।
लालू आवास के दही-चूड़ा का भोज होता है बिहार के लिए खास
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के घर मकर संक्रांति के अवसर पर दिया जाने वाला दही-चूड़ा के भोज की चर्चा आम और खास सबके बीच रहती है। इस भोज का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। लेकिन, इस बार लालू परिवार पर आई विपत्ति के कारण संक्रांति का त्‍योहार फीका ही रहेगा।
राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद रांची के जेल में हैं और उनकी बेल मकर संक्राति तक हो सकेगी या नहीं, इसपर संशय बना हुआ है। वैसे, उनकी बेल की तैयारी चल रही है।
हाइकोर्ट के वकील ने कहा-मुश्किल है अभी लालू की जमानत
पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरि का कहना है कि बेल पिटीशन फाइल करने की प्रक्रिया में समय तो लगेगा ही, साथ ही साथ हाईकोर्ट में विशेष अदालत से रिकार्ड जाने की भी एक प्रक्रिया है। इसमें भी समय लगता है। इसलिए यह कहना कि तुरंत बेल मिल जाएगी, उचित नहीं। मेरिट पर भी सुनवाई होगी और इसमें भी समय लगेगा।
गिरि ने कहा कि इसके अतिरिक्त चारा घोटाला मामले में ही सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय यह है कि विशेष अदालत द्वारा जो सजा सुनायी गई है, उस अवधि का 50 फीसद जेल में काटने के बाद ही बेल संभव है। वैसे सुप्रीम कोर्ट से ही पिछली बार लालू प्रसाद को बेल मिल चुकी है। उस समय लालू प्रसाद की सजा की अवधि पांच वर्ष की थी। हां, स्वास्थ्य वजहों से बेल के तर्क को आधार मिल सकता है।
पिछले साल की मकर संक्रांति, याद करेंगे लोग
जिन दोस्तों ने पिछले साल एक साथ बैठकर दही-चूडा़, तिलकुट का भोज खाया था, वो इस बार किसी और के साथ भोज का मजा लेंगे। पिछले साल की मकर संक्रांति के भोज की बात करें तो लालू आवास पर उस वक्त हंसी-खुशी का माहौल था।
पिछली बार लालू की बड़ी बेटी मीसा भारती ने खुद भोज के आयोजन की कमान संभाली थी। मिट्टी के बरतन में दही जमाया गया था, कई क्विंटल चूड़ा लोगों के बीच बांटा गया था। गया के तिलकुट के पैकेट का ढेर लग गया था तो वहीं आलू-गोभी मटर की सब्जी की खुशबू माहौल को और खुशनुमा बना रही थी।
दो दिनों तक चला था भोज
पिछले साल दो दिनों तक लालू आवास पर मकर संक्रांति का भोज चलता रहा था। इसमें शामिल होने के बाद लोगों ने उसे यादगार करार दिया था। लेकिन, किसी को पता नहीं था कि हंस-हंसकर लोगों को अपने हाथों से दही परोसने वाले लालू एक साल बाद जेल में रहेंगे और उनकी पत्नी, बेटे-बेटियों पर जांच एजेंसियों की तलवार लटक रही होगी।
बुरी नजरों से बचाने के लिए लालू ने लगाया था नीतीश को दही का टीका
पिछले भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी लालू-राबड़ी आवास पहुंचे थे। एन्‍होंने वहां दही-चूड़ा, सब्जी तिलकुट खाया था। नीतीश के पहुंचने के बाद लालू ने अपने हाथों से बुरी नजरों से बचाने के लिए नीतीश के ललाट पर दही का तिलक लगाया था। दोनों सहृदयता से गले मिले थे।
लालू ने नीतीश को तिलक लगाने के बाद कहा था कि भाजपा नीतीश कुमार के खिलाफ जितनी साजिशें करेगी, उससे बीजेपी को ही नुकसान होगा। इसके बाद जदयू के भोज में उन्होंने घोषणा कर डाली कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार 20 साल चलेगी। लालू यादव ने फिर भाजपा पर हमला बोला और कहा, ‘भाजपा खटमल की तरह है, जिसे अब बाहर निकालकर फेंका जाएगा और नीतीश कुमार महागठबंधन के मुख्यमंत्री हैं।’
लग गई बुरी नजर
तब लालू और नीतीश की गला मिलती तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं थीं। इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ही पार्टी अध्यक्ष शरद यादव व अन्य पार्टी नेता भी शामिल हुए थे। लेकिन, इस बार कुछ की राहें बदल गई हैं तो कुछ अलग तरह की दोस्ती बना और निभा रहे हैं।
जदयू के भोज के वक्त ही खटका था लालू को
मुख्यमंत्री नीतीश पहले लालू यादव के घर दही-चूड़ा भोज में पहुंचे तो बाद में लालू यादव भी जदयू के भोज में पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने बशिष्ट नारायण सिंह को अपने हाथों से तिलकुट खिलाया। जदयू के दही-चूड़ा भोज में कांग्रेस नेता अशोक चौधरी, अवधेश सिंह सहित कई नेता भी पहुंचे। लालू के आमंत्रण पर नहीं पहुंचे भाजपा के नेता जदयू के भोज में पहुंच गए थे। इसे लेकर उसी वक्त अटकलों का दौर शुरू हो गया था।
लालू के दही चूड़ा भोज में नहीं जाने पर भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा था कि सम्मानपूर्वक आमंत्रण नहीं मिला था, इसीलिए नहीं शामिल हुए। इसका खंडन करते हुए लालू ने कहा कि जैसे सबको बुलाया गया था वैसे ही भाजपा नेताओं को भी बुलाया गया।
कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
उसके बाद जदयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने चूड़ा-दही के भोज कांग्रेस और भाजपा नेताओं को भी बुलाया। इसपर कांग्रेस के नेताओं ने सवाल उठाया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा, ‘जदयू ने भाजपा को भोज पर क्यों बुलाया, ये तो वशिष्ठ नारायण सिंह ही बता सकते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘पिछले दो साल से भाजपा को न्योता नहीं दिया गया। इस साल ऐसी क्या बात हो गई कि उन्हें न्योता मिला है। मुझे नहीं लगता कि अभी महागठबंधन में कोई दिक्कत है।’
भोज के बहाने भाजपा ने बढ़ाया था दोस्ती का हाथ
कांग्रेस ने भाजपा को भोज में बुलाए जाने पर सवाल उठाया तो भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा कि जदयू से हमारा रिश्ता 17 साल पुराना है। उन्होंने कहा, ‘इतने सम्मान से बुलाया गया है, तो जरूर आऊंगा।’ उन्होंने कहा कि इस भोज का राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। हालांकि, हमने मिलकर साढ़े सात साल सरकार भी चलाई है। लेकिन, ये केवल एक भोज है। इस भोज का ही रंग बाद में दिखा। जदयू ने राजद से अपना नाता तोड़ लिया।
देखते ही देखते पासा पलट गया और ‘खटमल’ वाली भाजपा, ‘साजिश करने वाली’ भाजपा ही नीतीश कुमार की पसंद बन गई। बिहार में दोनों दोस्तों ने फिर से हाथ थाम लिया और बिहार में एनडीए की सरकार बन गई। नीतीश कुमार अब तेजस्वी और तेजप्रताप के ‘अच्छे चाचा’ नहीं रहे।
मीसा ने फेसबुक पर पोस्ट की तस्वीरें
बीते साल लालू की बड़ी बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने लालू के संक्रांति भोज का जिम्मा संभाल रखा था। मीसा ने इसकी तस्वीरें फेसबुक और ट्विटर पर शेयर की थीं। लेकिन, इस साल महागठबंधन टूट चुका है और अब राजद का साथ छोड़ जदयू ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली है। इस साल लालू के दही-चूड़ा भोज पर संशय है तो जदयू का भोज भी अलग तरह का होगा।

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