देश के इतिहास में पहली बार SC के जजों ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, कहा-खतरे में हैं लोकतंत्र

0
841

नई दिल्लीः देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस जस्टिस जे चेलामेश्वर के घर में हुई। चीफ जस्ट‍िस दीपक मिश्रा को छोड़कर इसमें जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे। उन्होंने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को इसके लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया। इन न्यायाधीशों ने न्यायमूर्ति मिश्रा को लिखे एक पत्र में कहा कि मुख्य न्यायाधीश का पद समान स्तर के न्यायाधीशों में पहला होता है। उन्होंने पत्र में लिखा कि तय सिद्धांतों के अनुसार मुख्य न्यायाधीश को रोस्टर तय करने का विशेष अधिकार होता है और वह कोर्ट के जजों या पीठों को सुनवाई के लिए मुकद्दमें आवंटित करता है। मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकार अदालत के सुचारु रूप से कार्य संचालन एवं अनुशासन बनाये रखने के लिये है न कि मुख्य न्यायाधीश के अपने सहयोगी न्यायाधीशों पर अधिकारपूर्ण सर्वोच्चता स्थापित करने के लिए। इस प्रकार से मुख्य न्यायाधीश का पद समान स्तर के न्यायाधीशों में पहला होता है, न उससे कम और न उससे अधिक।
सुप्रीम कोर्ट में सब ठीक नहीं
जजों ने आज कोर्ट की प्रशासकीय खामियों से देश को आज अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा है। जब कोई विकल्प नहीं बचा तो हम सामने आए हैं। हमने इस मामले में चीफ जस्टिस से बात की। सीनियर जजों ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में हैं। जजों ने कहा कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को इस संबंधित हमने चिट्ठी भी लिखी थी लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। जजों ने वो चिट्ठी मीडिया के सामने सार्जनिक भी की। जजों ने कहा कि हम चिट्ठी इसलिए सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि कल कोई ऐसा मत कहे कि हमने आत्मा बेच दी।”
उन्होंने चुनींदा ढंग से मुकद्दमे सुनवाई के लिए चुनींदा न्यायाधीशों को आवंटित किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि रोस्टर तय करने के लिए परिभाषित प्रक्रिया एवं परंपराएं मुख्य न्यायाधीश को दिशानिर्देशित करतीं हैं जिनमें किन प्रकार के मुकदमों की सुनवाई के लिये कितने न्यायाधीशों की पीठ बनायी जाए, उसकी परंपराएं भी शामिल है। न्यायाधीशों ने कहा कि इन परंपराओं एवं नियमों की अवहेलना से ना केवल अप्रिय स्थिति बनेगी बल्कि संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होगी और गंभीर परिणाम होंगे। पत्र में उन्होंने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जिनकेे देश और न्यायपालिका पर दूरगामी परिणाम पड़े हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कई मुकद्दमों को बिना किसी तार्किक आधार‘अपनी पसंद’के हिसाब से पीठों को आवंटित किया है। ऐसी बातों को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी लिखा कि न्यायपालिका के सामने असहज स्थिति पैदा ना हो, इसलिए वे अभी इसका विवरण नहीं दे रहे हैं लेकिन इसे समझा जाना चाहिए कि ऐसे मनमाने ढंग से काम करने से संस्था की छवि कुछ हद तक धूमिल हुई है। वहीं जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर राहुल गांधी ने कांग्रेस के सांसदों और वकीलों की बैठक बुलाई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.