सीएम नीतीश की मानव श्रृंखला पर लगा ग्रहण, हाइकोर्ट में सुनवाई आज

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दहेज प्रथा औऱ बाल विवाह के खिलाफ बिहार सरकार की ओर से बनाई जाने वाली मानव श्रृंखला के खिलाफ एक वकील की तरफ से पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसपर आज सुनवाई होगी
पटना । क्या सीएम नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी मानव श्रृंखला की योजना खटाई में पड़ जाएगी? अब इसका आयोजन पटना हाईकोर्ट के फैसले पर टिक गया है। इसके आयोजन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डॉ.अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ इस मसले पर सुनवाई करेगी। याचिका नागरिक अधिकार मंच की ओर से अधिवक्ता रीतिका रानी ने हाईकोर्ट में दायर की है।
मानव श्रृंखला के औचित्य पर खड़े किए गए सवाल
याचिकाकर्ता का कहना है कि 11 जनवरी को शिक्षा विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी ने दहेज उन्मूलन एवं बाल विवाह के विरोध में बननेवाले मानव श्रृंखला में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों को छोड़कर शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं को इस आयोजन में शामिल होने के निर्देश दिए। 21 जनवरी के इस आयोजन में बच्चों को लाने एवं उन्हें घर पहुंचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होगी। इस कार्य के लिए शिक्षकों को वजीफा दिया जाएगा।
याचिकाकर्ता ने पूछा है कि इस कड़ाके की सर्दीे में बच्चों को घर से निकलने के लिए कैसे बाध्य किया जा सकता है। छात्र-छात्राओं को को नये सत्र के लिए किताबें नहीं दी गई है। इन्हें गर्म कपड़े भी नहीं दिये गये हैं। शिक्षकों से पठन पाठन के अलावा अन्य कार्य लिया जाना भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा है कि बाल विवाह अधिनियम 1973 और दहेज उन्मूलन एक्ट 1961 का है। इसमें नया क्या है? इसे राजनीतिक लाभ के लिए नाहक नयी बात बनायी जा रही है। पिछले साल भी शराबबंदी कानून के समर्थन में मानव श्रृंखला का आयोजन किया गया था। यह सब राजनीति के सिवा कुछ भी नहीं है जिसमें हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।

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