आवक में बढ़ोतरी से प्याज सस्ता

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बीते दो दिनों में प्रमुख मंडियों में प्याज की आवक बढ़ने से सोमवार को इसकी कीमतें गिरकर करीब एक चौथाई रह गईं। दरअसल प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) बहुत अधिक होने से निर्यात की संभावनाएं कमजोर हैं, जिससे घरेलू बाजार में आवक बढ़ रही है। प्याज की बेंचमार्क मंडी लासलगांव में प्याज की मॉडल कीमत 21.50 रुपये से घटकर 6.50 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। मंगलवार को महाराष्ट्र की सभी कृषि विपणन समितियां मथाडी द्वारा मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर राज्यस्तरीय बंद के चलते बंद थी। लासलगांव में बीते दो माह के दौरान पहली बार प्याज के दाम 25 रुपये किलो प्रति किलोग्राम से नीचे आए हैं और 1 नवंबर, 2017 से तीसरी बार ऐसा हुआ है। पिछले सप्ताह गुरुवार को प्याज की आवक पिछले सप्ताह सोमवार के 1,600 टन के मुकाबले अचानक बढ़कर 1,800 टन हो गई। बुधवार यानी 24 जनवरी को सत्र की सबसे कम 1,000 टन आवक हुई थी।

मंडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा प्याज के दाम मंडी में इसकी आवक बढ़ने से घटे हैं। प्याज किसानों ने मौजूदा ऊंची कीमतों का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह नहीं पकी फसल की भी खुदाई शुरू कर दी थी। इस प्रकार मंडियों में आने वाली नमी वाले प्याज को इसके खराब होने के डर की वजह से तुरंत बेचे जाने की जरूरत है। प्याज उत्पादक दो प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात से नई फसल की पैदावार मंडियों में आने लगी है। ऐसे में आगे भी प्याज की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है।

थोक बाजारों में प्याज के दाम गिरने का असर अगले एक सप्ताह में उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर दिख सकता है। दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं ने प्याज का दैनिक उपयोग 50 से 60 फीसदी घटा दिया है। कुछ सप्ताह में प्याज की खुदरा कीमतें 20 रुपये प्रति किलोग्राम के किफायती स्तर पर आने पर उपभोक्ता फिर से अपनी खपत बढ़ा सकते हैं। बीते तीन माह से प्याज के दाम 40 रुपये किलोग्राम से ऊपर बने हुए थे। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमत 51 रुपये और मुंबई में 46 रुपये किलोग्राम थी।

प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय ने 29 दिसंबर, 2017 को इसके निर्यात पर 850 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगा दिया था। हालांकि बाद में 19 जनवरी, 2018 को इसे घटाकर 700 डॉलर प्रति टन कर दिया गया। इसके बावजूद लासलगांव मंडी में इस अवधि के दौरान प्याज के दाम 25 से 34 रुपये किलोग्राम के बीच बने रहे। बागवानी निर्यातक संघ के अध्यक्ष अजीत शाह ने कहा इस सीजन में प्याज के दाम ऊंचे बने रहे क्योंकि पिछले सीजन में प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बाढ़ और पछेती खरीफ सत्र की फसल कमजोर रहने से इसकी उपलब्धता कम थी। इस साल प्याज की निर्यात मांग भी अनुकूल रही। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक वर्ष 2017-18 में 2.14 करोड़ टन प्याज पैदा होने का अनुमान है, जो वर्ष 2016-17 की पैदावार 2.24 करोड़ टन से करीब 4.5 फीसदी कम है।

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