महज एक साल में ही BJP से मोहभंग, अरविंदर सिंह लवली हुए कांग्रेस में शामिल

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नई दिल्ली (जेएनएन)। दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को झटका देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाले अरविंदर सिंह लवली ने घरवापसी की है। एक साल पहले (2017) शामिल हुए अरविंदर लवली ने फिर कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली है। लवली शीला दीक्षित के खेमे के माने जाते हैं। इतना ही नहीं, दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर भी अरविंद सिंह लवली अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
कांग्रेस पार्टी की सदस्यता लेने के बाद अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि मेरे लिए कोई खुशी का निर्णय नहीं था कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी को ज्वाइन करना। पीड़ा में लिया गया फैसला था। वैचारिक रूप से मैं भाजपा में अनफिट था।
अरविंदर की पार्टी में वापसी पर कांग्रेस नेता शीला दीक्षित ने कहा कि मुझे काफी अच्छा लग रहा है कि वो (अरविंदर ) वापिस आए हैं। उन्होंने पाया कि आखिर में अपना घर ही अच्छा होता है।
कांग्रेस पर ‘लवली वार’, शीला दीक्षित को बताया बोझ, माकन को कहा आरामपसंद
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने के बात से अरविंदर सिंह लवली की अनबन शुरू हो गई थी। हालात इस कदर बिगड़ गए थे कि उन्होंने कांग्रेस से ही इस्तीफा दे दिया था।
शीला दीक्षित सरकार में शिक्षा, शहरी विकास, पर्यटन और परिवहन मंत्री रह चुके हैं। अरविंदर सिंह लवली कांग्रेस के 4 बार विधायक रहे हैं। 1998 में पहली बार दिल्ली के गांधी नगर से विधायक बने थे।
दो-दो चुनाव में करारी हार से ‘कमजोर’ हुए अजय माकन, एकजुट होने लगे विरोधी
यह भी गौर करने वाली बात है कि दो दिन पहले ही शीला दीक्षित और अजय माकन के बीच समझौता हुआ है। अजय माकन ने अपनी गलती मान कहा था कि उन्हें शीला दीक्षित को पहले मना लेना चाहिए था।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने पिछले दिनों अपनी ही पार्टी के पुराने नेताओं के साथ बैठक की थी। अजय माकन ने खुद स्वीकार किया था कि वह सभी साथ लेकर चलने में नाकाम रहे। यही वजह थी कि पिछले चुनावों में हार मिली है। वहीं, उनके इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने प्रतिक्रिया में कहा था कि अजय माकन ने अपनी गलती सुधार ली है।

यहां पर बता दें कि दिल्ली MCD चुनाव से पहले टिकट बंटवारे से नाराज होकर अरविंदर सिंह लवली ने कांग्रेस छोड़कर 4 अप्रैल 2017 के दिन भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। भाजपा में शामिल होने के दौरान अरविंदर ने कहा था कि उन्होंने अपने आत्मसम्मान के लिए कांग्रेस का साथ छोड़ा था।
अप्रैल, 2017 में भाजपा ज्वाइन करने के दौरान यह कहा था लवली ने
1. मैंने जिस कांग्रेस पार्टी को ज्वाइन किया था, वह अब बदल गई है, उसकी विचारधारा बदल गई है और यही मेरे पार्टी छोड़ने का कारण है।
2. जिस पार्टी में अपने नेताओं का कोई सम्मान नहीं है तो उससे गरीबों और दलितों का हिमायती होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
3. मैं बहुत असहाय महसूस कर रहा था। चुनाव समिति में कोई भूमिका नहीं थी। पार्टी के घोषणापत्र पर कोई राय नहीं ली जाती थी तो हम पार्टी में कर क्या रहे थे?
4. एक पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष का काम पार्टी को जोड़कर रखना होता है, न कि पार्टी के कैडर को खत्म कर देना। उस पार्टी का भविष्य कैसा होगा, जो अपने नेताओं का ख्याल नहीं रखती।

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