झटका: एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ देशों में शामिल होने जा रहा है पाकिस्तान

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आतंकवादियों को फंडिंग और मनीलांड्रिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करने और गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) और चीन की तरफ से विरोध वापस लेने के बाद फानेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) अब पाकिस्तान की ‘ग्रे लिस्ट’ देशों में शामिल करने जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि इसका औपचारिक ऐलान शुक्रवार के बाद कर दिया जाएगा।
नई दिल्ली और इस्लामाबाद के कई सूत्रों ने यह बताया कि एफएटीएफ की पेरिस में हुए प्लेनरी मीटिंग में जीसीसी और चीन के विरोध वापस लेने के बाद अमेरिका समर्थित प्रस्ताव पास हुआ। इस प्रस्ताव का शुरुआत में सऊदी अरब, चीन और तुर्की ने विरोध किया। लेकिन, अंत में सिर्फ तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया। अमेरिका के अलावा जिन देशों ने इसका समर्थन किया वो थे ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस।
एफएटीएफ ने की थी पाक के कदमों की समीक्षा
पश्चिमी देशों ने अन्य देशों के साथ बातचीत कर लॉबिंग की और आखिरी क्षणों में वह अपने मकसद में सफल रहे। एफएटीएफ ने जमात उद दावा (जेयूडी) और फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) की फाइनेंसिंग पर पाकिस्तान की तरफ से उठाए गए कदमों की समीक्षा की थी। ये दोनों ही समूह लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद से जुड़े हैं जिस पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंध लगाया हुआ है।
पाकिस्तान ने अपने आपको ग्रे लिस्ट से बचने के लिए काफी मशक्कत की थी और पश्चिमी देशों का समर्थन हासिल करने का प्रयास किया था। उसे रूस से भी ग्रे लिस्ट में शामिल होने से बचने के लिए समर्थन मांगी थी, जहां से उसे तीन साल पहले 2015 में हटाया गया था।
क्या होगा असर
पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट देशों में शामिल करने के बाद वहां पर व्यवसाय करना काफी कठिन हो जाएगा क्योंकि बैंक और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठनों की तरफ से लेनदेन की काफी बारीकी से नजर रखी जाएगी। पाकिस्तान इस लिस्ट में पहले भी साल 2013 से 2015 के बीच रहा है।

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