Rotomac Scam: 37 अरब का चूना लगाने वाले विक्रम कोठारी और उनके बेटे राहुल को सीबीआई ने किया गिरफ्तार

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सीबीआई ने सात बैंकों के साथ 3695 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में रोटोमैक कंपनी के चेयरमैन विक्रम कोठारी और उनके पुत्र राहुल कोठारी को गुरुवार रात गिरफ्तार कर लिया। पिता-पुत्र से दो दिन तक सीबीआई मुख्यालय में करीब 20 घंटे तक लंबी पूछताछ की गई थी। सूत्रों का कहना है कि दोनों के बयान विरोधाभासी थे और वे पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे। दोनों की गिरफ्तारी के साथ ही उनके करीबियों और बैंक के भ्रष्ट अधिकारियों पर भी शिकंजा कसने की आशंका प्रबल हो गई है।
गुरुवार रात सवा आठ बजे सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ ने विक्रम कोठारी तथा उनके बेटे की गिरफ्तारी की पुष्टि की। दोनों आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
बैंक घोटाले के मामले में विक्रम और राहुल को बुधवार को दिल्ली सीबीआई मुख्यालय लाया गया था। दोनों को देर रात छोड़ दिया गया था, लेकिन गुरुवार सुबह ही उन्हें मुख्यालय आने के लिए कहा गया था। दिल्ली लाकर पूछताछ से पहले विक्रम कोठारी, उनकी पत्नी साधना व बेटे से कानपुर में भी पूछताछ की गई थी। सीबीआई उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी कर चुकी थी ताकि वह देश छोड़ कर न भाग सकें।
सीबीआई ने 18 फरवरी को रोटोमैक समूह के चेयरमैन विक्रम कोठारी के आवास, फैक्ट्री और मुख्यालय में छापे मारे थे। ये कार्यवाही बैंक आफ बड़ौदा के जनरल मैनेजर ब्रजेश सिंह द्वारा दर्ज रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। 19 फरवरी को उन्नाव स्थित मोहन स्टील्स में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापा मारकर उनके खिलाफ मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया था। इन दोनों एजेंसियों के बाद आयकर विभाग ने कंपनी के 14 बैंक खातों को अटैच कर दिया था। कोठारी सहित उनके परिजनों के पासपोर्ट , मोबाइल तथा अन्य दस्तावेज जब्त किए थे।
नई दिल्ली स्थित उनकी एक संपत्ति तथा ऑफिस को सील पहले ही सील किया जा चुका है। इसी तरह फैक्ट्री में कर्मचारियों से पूछताछ के अलावा बड़ी संख्या में दस्तावेजों को कब्जे में लिए हैं।
इन बैंकों से की गई धोखाधड़ी
रोटोमैक पर सात बैंकों का 3695 करोड़ रुपए का लोन बकाया है। सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोप लगाए गए हैं कि रोटोमैक समूह ने धोखाधड़ी करके बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से 2919 करोड़ रुपए का लोन लिया था। ब्याज मिलाकर ये रकम 3695 करोड़ रुपए पहंच गई।
आयकर विभाग ने भेजा नोटिस
आयकर विभाग ने गुरुवार को रोटोमैक समूह को कारण बताओ नोटिस भेजा। विभाग ने पूछा है कि आखिर क्यों न उनके अभियोग चालाया जाए। विभाग कंपनी के कोटेक महेंद्रा बैंक के 11 खातों को सील कर चुका है। वहीं सीबीआई भी कोठारी की कानपुर स्थित तीन और अहमदाबाद की एक संपत्ति को जब्त कर चुकी है।
ईडी भी कस रहा नकेल
आयकर विभाग और सीबीआई की कार्रवाई के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी कोठारी की कपंनी पर नकेल कसी है। एजेंसी ने सीबीआई की प्राथिमिकी के आधार पर 18 फरवरी को रोटोमैक ग्लोबल प्रा.लि. कंपनी और उसके प्रमोटर विक्रम कोठारी, उनकी पत्नी साधना कोठारी और बेटे राहुल के खिलाफ मनी लाड्रिंग का मामला दर्ज किया था।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था केस
सीबीआई ने नई दिल्ली में आईपीसी की धारा 420, 467, 468 व 471 के अलावा प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 13 (2) व 13 (1) (डी) में मुकदमा दर्ज करने के बाद कानपुर में छापेमारी की थी। इसमें मेसर्स रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लि. कानपुर के अलावा इसके तीनों निदेशकों और अज्ञात बैंक अधिकारियों को नामजद किया गया है।
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कैसे किया विक्रम कोठारी ने घोटाला
रोटोमैक कंपनी को 7 बैंकों ने लोन दिया था। विक्रम कोठारी पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मुंबई शाखा की 485 करोड़, इलाहाबाद बैंक कोलकाता शाखा की 352 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा (लीड बैंक) की 600 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया की 1365 करोड़ और इंडियन ओवरसीज बैंक की 1000 करोड़ रुपए की बकाएदारी है। बैंकों का आरोप है कि विक्रम कोठारी ने कथित तौर पर न लोन की रकम लौटाई और न ही ब्याज दिया। इस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों पर ऑथराइज्ड जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी ने 27 फरवरी 2017 को रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लि. को विलफुल डिफाल्टर (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकानेवाला) घोषित कर दिया। कमेटी ने लीड बैंक की पहल पर यह आदेश पारित किया था।
13 अप्रैल 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोटोमैक ग्लोबल को उसकी उन संपत्तियों का ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया जिनका बॉब को भुगतान किया गया है। कंपनी ने दलील दी कि रोटोमैक द्वारा चूक की तिथि के बाद से इस बैंक को 300 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियों की पेशकश किए जाने के बावजूद बॉब ने उसे इरादतन चूककर्ता घोषित कर दिया। बैंक की ओर से पेश वकील अर्चना सिंह ने कहा था कि कंपनी को अपने बकाए का निपटान करने के लिए 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।

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