सात समंदर पार हुआ प्यार, बुद्धभूमि पर हुआ इकरार, जानिए पूरी लव स्‍टोरी

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सात समंदर पार हुआ प्यार का परवान इतना चढ़ा कि बुद्धभूमि पर आकर दोनों ने इकरार कर परिणय सूत्र में बंधने का निर्णय ले लिया।
गया । सात समंदर पार हुआ प्यार का परवान इतना चढ़ा कि बुद्धभूमि पर आकर दोनों ने इकरार कर परिणय सूत्र में बंधने का निर्णय ले लिया। दोनों प्रेमी यूं तो बोधगया में संचालित एक विदेशी संस्था में बतौर स्वयंसेवक के रूप में काम करने आए थे, लेकिन यहां आकर दोनों ने गतेक दिनों कई शादियां देखीं और फिर भारतीय संस्कृति के कायल होते हुए परिणय सूत्र में बंधने का निर्णय लिया। इसमें दोनों का सहयोग संस्था बोधि ट्री के निदेशक धीरेन्द्र शर्मा ने किया।
माल्टा के युवक डेविड लेखक है और उनकी प्रेमिका तिजियाना नर्स है। दोनों भारतीय संस्कृति से काफी प्रभावित थे। यू ट्यूब पर वैदिक रीति से होने वाले भारतीय शादी को देखा और निर्णय लिया कि भारत जाकर वैदिक रीति से परिणय सूत्र में बंधेंगे। दोनों एक पखवारे पहले बोधगया पहुंचे और शादी की तैयारी शुरू कर दी। डेविड व तिजियाना के परिणय सूत्र के गवाह लगभग एक हजार ग्रामीण, अधिकारी, स्कूली बच्चे व विदेशी पर्यटक बने। जिन्हें बतौर डेविड ने शादी के लिए आमंत्रित किया।
एक से प्‍यार, दूसरे से शादी की तैयारी, यूं पकड़ी गई चालाकी
शादी के रस्म के तहत दुल्हन-दूल्हा की मेहंदी हुई, हल्दी हुआ, ग्रामीण महिलाओं ने दोनों का चुमावना किया। उसके बाद गाजे-बाजे के साथ बरात निकली। भारतीय परिधान में दूल्हा-दुल्हन आकर्षण का केन्द्र बने रहे। बरातों का स्वागत और शानदार भोज में परोसे गए लजीज व्यंजनों का लुत्फ बरातियों ने उठाया। जयमाल हुआ, लोगों ने दूल्हा-दुल्हन पर फूलों की वर्षा की। सिंदुर दान के पश्चात कन्या दान का रस्म जमना लाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित भाई द्वारिको सुन्दरानी ने पूरा किया।

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