देविका रानी समेत इन 7 अभिनेत्रियों का हमेशा कर्जदार रहेगा बॉलीवुड,

0
473

बॉलीवुड में भी समाज की तरह ही हमेशा पुरुषों का बोलबाला रहा है लेकिन, कुछ ऐसी नायिकाएं भी रही हैं जिन्होंने एक नयी लकीर खींच कर अपनी मौजूदगी का अहसास कराया।
मुंबई। 9 मार्च को देविका रानी की पुण्यतिथि होती है। बॉलीवुड में भी समाज की तरह ही हमेशा पुरुषों का बोलबाला रहा है लेकिन, कुछ ऐसी नायिकाएं भी रही हैं जिन्होंने एक नयी लकीर खींच कर अपनी मौजूदगी का अहसास कराया। देविका रानी उनमें से एक हैं। देविका रानी को भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री कहा जाता है। वे 30 मार्च 1908 को जन्मी थीं और उनका निधन 9 मार्च 1994 को हुआ। देविका रानी ने अपने दम पर सिनेमा का चेहरा और मायने बदल कर रख दिया था। उनके नाम के बिना सिनेमा का कोई भी अध्याय कभी पूरा नहीं हो सकता! देविका रानी सिनेमा की पढ़ाई करने के बाद अभिनेत्री बनने वाली पहली महिला रही हैं। देविका रानी और उनके पति हिमांशु राय ने मिलकर प्रतिष्ठित बांबे टाकीज़ स्टूडियो की स्थापना की थी जो कि भारत के प्रथम फ़िल्म स्टूडियो में से एक है। अशोक कुमार, दिलीप कुमार, मधुबाला जैसे महान कलाकार बांबे टाकीज़ के साथ काम कर चुके है। ‘अछूत कन्या’, ‘किस्मत’, ‘शहीद’, ‘मेला’ जैसे अत्यंत लोकप्रिय फ़िल्मों का निर्माण वहां हुआ। पति के निधन के बाद देविका रानी के इस स्टूडियो का बंटवारा हो गया और फ़िल्मिस्तान का जन्म हुआ। 21 साल की हुईं श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर, कुछ इस अंदाज़ में मनाया बर्थडे,पति की मौत और बॉम्बे टॉकीज को छोड़ने के बाद देविका रानी लगभग टूट सी गई थीं। इस बीच उनकी मुलाकात रूसी चित्रकार स्वेतोस्लाब रोरिक से हुई जिनसे उन्होंने शादी कर ली और फिर इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। साल 1969 में जब दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत की गई तो इसकी सर्वप्रथम विजेता देविका रानी ही थीं। देविका इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें पद्मश्री से नवाज़ा गया। फ़िल्मों में हीरोइनों के लिए एक रास्ता बनाने का काम कर चुकी थीं इसलिए भी उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा!
माधुरी बनीं बॉलीवुड की पहली ‘प्रेरणादायी हस्ती’
देविका के अलावा कुछ और अभिनेत्रियां आईं जिन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई! जैसे नर्गिस का असर भी हिंदी सिनेमा पर बहुत गहरा रहा है। उन्होंने अपने निभाये गए किरदारों से अपनी एक लार्जर देन लाइफ़ इमेज बना ली थी और आज भी उनकी ‘मदर इंडिया’ जैसी फ़िल्में एक मिसाल हैं।
नूतन का नाम भी भारतीय सिनेमा की सर्वकालीन अभिनेत्रियों में बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा। ‘बंदिनी’, ‘सुजाता’, ‘सीमा’ समेत सैकड़ों फ़िल्मों के जरिये एक सहज और सशक्त अभिनय की वो एक मिसाल हैं।
स्टार अभिनेत्री रेखा का भी अपना एक सुनहरा दौर रहा है। कभी फ़िल्में उनके नाम से और उनके दम पर चलती थीं। कम उम्र से ही उन्होंने बड़ी कामयाबी पानी शुरू कर दी थी और यक़ीनन बॉलीवुड अभिनेत्रियों का इतिहास लिखा जाए तो वह रेखा के बिना पूरा नहीं होगा।
श्रीदेवी का करिश्मा भी हमेशा याद किया जाएगा। तीन सौ से भी ज्यादा फ़िल्मों में काम करने वाली श्री एक बेहतरीन अभिनेत्री के रूप में हमेशा याद रहेंगी! सिनेमा का एक पूरा दौर उनके नाम रहा है!
ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी को भी इस लिस्ट में शामिल किये बिना यह लिस्ट अधूरी है। उन्होंने अपने अभिनय और करिश्मे से बड़े पर्दे पर एक नयी दुनिया रची।
90 के दशक की बात करें तो धक्-धक् गर्ल माधुरी दीक्षित ही एक मात्र ऐसी अभिनेत्री रही हैं जिनकी एक मास अपील रही है।
उपलब्धियों की मिसाल है अनुपम खेर की जीवन-यात्रा, जानिये उनके पहले प्यार समेत कुछ रोचक राज़
ज़ाहिर, है ये सभी अभिनेत्रियां हिंदी सिनेमा की सर्वकालिन बेस्ट अभिनेत्रियों में शुमार हैं। इन सबने पुरुषों की रची दुनिया में महिलाओं को सम्मान दिलाने का काम किया!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.