पीएनबी घोटालाः डायमंड के नाम पर ‘गीतांजलि’ ने ग्राहकों को लूटा,खुलासे के बाद कारोबारियों ने खत्म की डीलरशीप

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‘हीरा है सदा के लिए’, इस टैगलाइन ने हीरे को जन-जन के बीच लोकप्रिय बनाने का काम किया। शुरू में केवल ‘अपर क्लास’ के हीरे ने ‘मिडिल क्लास’ में भी खासी जगह बना ली है। पंजाब नेशनल बैंक को 12 हजार करोड़ का चूना लगाकर विदेश भागने वाले नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने इसका फायदा उठाया और अपने ब्रांड ‘गीतांजलि’ की आड़ में ग्राहकों को जमकर लूटा। ‘गीतांजलि’ के हीरों की असली कीमत 35 फीसदी से ज्यादा नहीं है। यानी एक लाख का हीरे का सेट दोबारा बेचने पर 35 हजार का भी बिक जाए तो गनीमत है। यह असलियत जानने के बाद शहर के 25 सराफा कारोबारियों ने गीतांजलि से कारोबारी संबंध खत्म कर लिए थे। नीरव कांड के बाद ‘गीतांजलि’ के डायमंड सेट तो छोड़िए, सोने के सिक्के बेचने की भी होड़ मची है।
‘गीतांजलि’ ने डायमंड के नाम पर ग्राहकों की खूब जेब काटी। महंगे-महंगे विज्ञापन देकर और बॉलीवुड हस्तियों को बुलाकर ब्रांड खड़ा किया गया। शेयर बाजार के जरिए पब्लिक का पैसा जुटाकर शोरूम खड़े कर दिए गए। फिर लूट का धंधा शुरू हो गया। शहर के प्रतिष्ठित सराफा व्यापारियों का कहना है कि ‘गीतांजलि’ के माल की कीमत ईमानदारी से भी 35-40 फीसदी से ज्यादा नहीं है। खुद ‘गीतांजलि’ अपने बेचे डायमंड को अधिकतम 50 फीसदी कीमत पर खरीदता था। पर्चा साथ में हो तो अधिकतम 60 फीसदी रकम वापस दी जाती थी। माल कहीं और बेचने पर महज 40 फीसदी ही पैसा मिलता था।
अंधेरगर्दी देख नाता तोड़ा
बिरहाना रोड और स्वरूप नगर के दो दर्जन से ज्यादा व्यापारियों ने ‘गीतांजलि’ की चकाचौंध से प्रभावित होकर उसका माल बेचना शुरू किया लेकिन डायमंड की असलियत जानकर उनके होश उड़ गए। उनका कहना है कि ग्राहक उनके नाम और साख को देखकर शोरूम आता है न कि ‘गीतांजलि’ को देखकर। पुराना जेवर बेचना यहां का रिवाज है। सराफा व्यापारी तो 10-15 फीसदी कटौती कर पुराना जेवर खरीद लेते हैं। ऐसे में ‘गीतांजलि’ की ज्वैलरी में 40-50 फीसदी कटौती से उनकी साख दांव पर लग रही थी। यही वजह थी कि उन्होंने नीरव मोदी के ब्रांड से पीछा छुड़ा लिया। नीरव मोदी कांड के बाद से ‘गीतांजलि’ की ज्वैलरी बेचने के लिए बिरहाना रोड में रोजाना ग्राहक आ रहे हैं। अब तो ‘गीतांजलि’ के सोने के सिक्के भी बेचने की होड़ मच गई है। रोजाना 20-30 ग्राहक बेचने के लिए आ रहे हैं।
काशी ज्वैलर्स के वाइस चेयरमैन श्रेयांश कपूर ने कहा कि ज्वैलरी का बिजनेस पारदर्शिता और विश्वास का होता है लेकिन कुछ कंपनियों ने ब्रांड के नाम पर ग्राहकों को ठगने का काम किया। शेयर बाजार में चले गए। पब्लिक के पैसे से शोरूम खड़े कर दिए और ब्रांडिंग कर दी। ज्वैलरी को मार्केटिंग के दम पर बेचा। कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का नतीजा सामने है। जो व्यापारी ग्राहक को बेवकूफ समझते हैं, वास्तव में सबसे बड़े बेवकूफ वे खुद हैं। ग्राहक का विश्वास ही कारोबार का सबसे बड़ा आधार है।
डायमंड में ब्रांड के नाम पर बड़ा खेल है। गीतांजलि जैसी ब्रांडेड कंपनियां अपना बेचा हुआ हीरा आधे रेट पर खरीदती हैं। अन्य सराफा व्यापारियों के बेचने पर तो इसकी और भी कम कीमत मिलेगी। यही वजह है कि शहर के दर्जनों प्रतिष्ठित व्यापारियों ने गीतांजलि और इसके अन्य ब्रांड के डायमंड बेचने से दूरी बना ली थी। इसलिए आंख मूंदकर न खरीदें और डायमंड की असली कीमत जरूरत जानें। -महेश चंद्र जैन, अध्यक्ष यूपी सराफा एसोसिएशन
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लंदन तय करता है हीरे की कीमत
हीरे से जुड़ी बहुत सी भ्रांतियों और जानकारियों से लोग अनजान हैं। अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि सोने का बाजार भाव की तरह हीरे का भी बाजार भाव होता है। दोनों में इतना अंतर है कि सोने के भाव शेयर मार्केट की तर्ज पर हर पल निगाह के सामने रहते हैं लेकिन हीरे का भाव 15 दिन में एक बार निकलता है। हीरे का भाव अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निकाला जाता है। इसकी इंटरनेशनल रेट लिस्ट को ‘रैपेरोपोर्ट’ कहते हैं। डॉलर में निकलने वाली यह सूची लंदन से यह हर 15 दिन में जारी होती है। इसमें 2 सेंट से 10 कैरेट वजनी हीरे का भाव शामिल होता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा में उतार-चढ़ाव का सीधा असर हीरे की कीमत पर पड़ता है।

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