GDP अनुमान से लेकर मॉनसून और महंगाई तक, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चौतरफा खुशखबरी

0
296

नई दिल्ली
वर्ल्ड बैंक से लेकर मौसम विभाग और महंगाई के आंकड़े तक, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चौतरफा खुशखबरी आई है। वर्ल्ड बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष (2018-19) में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। तो मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मॉनसूनी बारिश अच्छी रहने से बंपर पैदावार होगी। वहीं, मार्च महीने में थोक महंगाई दर भी आठ महीने के निचले स्तर पर आ गया।
खत्म हुई जीएसटी की मुश्किल
वर्ल्ड बैंक का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था जीएसटी लागू करने के बाद विकास दर में आई अल्पकालिक गिरावट के दौर से बाहर निकल चुकी है। विश्व बैंक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 में अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.5 फीसदी के स्तर पर रहेगी।भारत की वजह से पूरे दक्षिण एशिया का स्तर बढ़ा
वर्ल्ड बैंक ने अपनी साउथ एशिया इकॉनमिक फोकस रिपोर्ट में कहा, ‘भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार की बदौलत इस क्षेत्र (दक्षिण एशिया) ने दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र का दर्जा दोबारा हासिल कर लिया है।’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आर्थिक विकास दर 2017 में 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 2018 में 7.3 प्रतिशत हो सकती है।मौसम का मिलेगा साथ
भारतीय मौसम विभाग ने इस साल अच्छी बारिश की संभावना जताई है। सोमवार को मौसम विभाग ने कहा कि जून से सितंबर की अवधि में मॉनसून के सामान्य रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के डीजी के जी रमेश ने कहा, ‘मॉनसून का लंबी अवधि (एलपीए) का औसत 97 फीसदी रहेगा जो कि इस मौसम के लिए सामान्य है। कम मॉनसून की ‘बहुत कम संभावना’ है। इससे पहले मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली प्राइवेट एजेंसी स्काईमेट ने भी 4 अप्रैल को कहा था कि 2018 में मॉनसून 100 फीसदी सामान्य रहने की संभावना है।
थोक महंगाई 8 महीने में सबसे कम
मार्च महीने में थोक महंगाई (होलसेल इन्फ्लेशन) भी नहीं बढ़ी। खाद्य महंगाई में कमी ने ईंधन और ऊर्जा की महंगाई के असर को समाप्त कर दिया। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के जरिए मापी जानेवाली महंगाई मार्च में 2.47 प्रतिशत के साथ आठ महीने के निचले स्तर पर आ गई। फरवरी में यह 2.48 प्रतिशत और पिछले वर्ष मार्च में 5.11 प्रतिशत थी।
खुदरा महंगाई में भी गिरावट
पिछले सप्ताह जारी डेटा में मार्च की खुदरा महंगाई दर गिरकर 4.28 प्रतिशत पर आ गई थी, जो इसका पांच महीने का निचला स्तर है। इसका कारण खाद्य उत्पादों की कीमतें नीचे आना था। यह फरवरी में 3.81 प्रतिशत थी। मार्च में सब्जियां 2.70 प्रतिशत, दालें 20.58 प्रतिशत और गेहूं 1.19 प्रतिशत सस्ती हुईं। आलू के दामों में महंगाई बढ़कर 43.2 प्रतिशत हो गई।
यह चुनौती भी
हालांकि, विश्व बैंक ने मध्याविध में निजी निवेश की वापसी को बड़ी चुनौती बताया है। इसके मुताबिक, देश में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट्स बढ़ने में कई स्थानीय बाधाएं हैं। इनमें कंपनियों पर बढ़ता कर्ज, नियामक और नीतिगत चुनौतियां आदि प्रमुख हैं। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, अमेरिका में ब्याज बढ़ने का भी भारत में निजी निवेश के रुख पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हर साल चाहिए 81 लाख नौकरियां
विश्व बैंक ने कहा, भारत को अपनी रोजगार दर बरकरार रखने के लिए सालाना 81 लाख रोजगार पैदा करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, हर महीने 13 लाख नए लोग कामकाज करने की उम्र में प्रवेश कर जाते हैं। विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के प्रमुख अर्थशास्त्री मार्टिन रामा ने कहा कि 2025 तक हर महीने 18 लाख से अधिक लोग कामकाजी उम्र में पहुंचेंगे। मार्टिन ने के मुताबिक, अच्छी खबर यह है कि आर्थिक वृद्धि नई नौकरियां पैदा कर रही हैं।
निवेश और निर्यात बढ़ाए भारत: WB
निजी निवेश तथा निजी खपत में सुधार से इसके निरंतर आगे बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि देश की वृद्धि दर 2019-20 और 2020-21 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत हो जाएगी। भारत को वैश्विक वृद्धि का फायदा उठाने के लिए निवेश और निर्यात बढ़ाने का सुझाव दिया है।विश्वबैंक ने माना कि जीएसटी लागू होने से भारत में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई थी और इसका नकारात्मक असर पड़ा था। लेकिन अर्थव्यवस्था अब इससे उबर चुकी है और यह वित्त वर्ष 2019 में विकास दर को 7.4 फीसदी तक पहुंचाने में मददगार होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.