अदालत को अपने राजनीतिक दंगल का अखाड़ा न बनाएं-सुप्रीम कोर्ट

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उच्चतम न्यायालय ने भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं से जुड़े हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के प्रतिद्वन्द्वी गुटों को मंगलवार को चेतावनी दी कि वे शीर्ष अदालत को अपनी राजनीतिक लड़ाई का अखाड़ा नहीं बनाएं।
न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा, हम राजनीतिक मसलों को शीर्ष अदालत में आने से नहीं रोक सकते। परंतु अपने राजनीतिक दंगल के लिए शीर्ष अदालत को अखाड़ा नहीं बनाएं। हम पिछले कुछ महीने से यह प्रवृत्ति देख रहे हैं। शीर्ष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री और वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता वीरभद्र सिंह को यह स्पष्ट कर दिया कि वह उन्हें उस मामले में पक्षकार के रूप में हटा सकती है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और उनके भाजपा सांसद पुत्र अनुराग ठाकुर राज्य क्रिकेट संघ में कथित भ्रष्टाचार के आरोपी हैं। सिंह ने धूमल, ठाकुर और अन्य के खिलाफ मुकदमा निरस्त करने के भाजपा सरकार के अनुरोध का विरोध करते हुए कहा कि इसके लिए कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा। धूमल और ठाकुर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस पटवालिया ने कहा कि प्रतिवादी वीरभद्र सिंह इस मामले में कोई स्थिति भी नहीं है। वह मुकदमा चलाने वाली एजेन्सी भी नहीं है। उन्हें तो संबंधित समय में मुख्यमंत्री होने के नाते याचिका में प्रतिवादी बनाया गया है।

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