CJI के खिलाफ महाभियोग: मुहिम जारी रखेगी कांग्रेस, बना रही है नई रणनीति

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नई दिल्ली
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस की महाभियोग की कोशिशों को उपराष्ट्रपति और शीर्ष अदालत द्वारा भले ही झटका लगा हो, लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी अभी अपनी इस मुहिम को रोकने वाली नहीं है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर सकती है। उधर, सीपीआई भी इस मामले में कूद सकती है।सीजेआई के खिलाफ महाभियोग की कोशिशों को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया था। कांग्रेस के राज्य सभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी याग्निक ने सोमवार को इसके खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की थी। जिसे बाद में कांग्रेस ने वापस ले लिया था।सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वकील और नेता सीजेआई के खिलाफ महाभियोग के मुहिम को जारी रखेंगे। बाजवा और याग्निक ने कहा कि यह तो ट्रेलर था बाकी चीजें तो अभी आनी हैं। पार्टी के एक सूत्र ने कहा, ‘हम इस मामले में शीर्ष अदालत में ताजा याचिका दाखिल करने की संभावना से इनकार नहीं कर सकते हैं। सीजेआई के खिलाफ महाभियोग की याचिका पर 64 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे और 20 अप्रैल को इसे उपराष्ट्रपति को सौंपा था। सीपीआई नेता डी राजा भी इस मामले में अलग से याचिका दाखिल करने की सोच रहे हैं।’एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि संवैधानिक महत्व के सवालों पर निर्णय होना चाहिए और अभी तथा भविष्य के लिए अहम है। दोनों सांसदों ने शीर्ष कोर्ट से सीजेआई द्वारा इस मामले की सुनवाई 5 जजों की संवैधानिक बेंच में भेजे जाने की प्रशासनिक आदेश की कॉपी मांग रहे थे। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हम इसके खिलाफ अपील करेंगे। हम आरटीआई के जरिए सीजेआई के प्रशासनिक आदेश की कॉपी हासिल करने की कोशिश करेंगे।’यह पूछे जाने पर कि क्या राज्यसभा सांसदों द्वारा इस मामले में याचिका वापस लेने के बाद फिर से नई याचिका दाखिल करने में कोई तकनीकी अड़चन नहीं होगी, इसपर सूत्र ने बताया कि कांग्रेस के वकील और नेताओं का मानना है कि किसी अन्य सासंदों द्वारा राज्यसभा के सभापति के 23 अप्रैल के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में नई याचिका दाखिल करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है।सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री सूत्रों ने बताया कि अगर बड़ी संख्या में सांसद राज्यसभा सभापति द्वारा महाभियोग की अपील खारिज करने से संबंधित याचिका फिर से शीर्ष अदालत में दाखिल करेंगे तो यह मामला भी जस्टिस ए के सिकरी, जस्टिश एस ए बोडबे, जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस आदर्श गोयल की बेंच के पास ही सुनवाई के लिए जाएगा।इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के सूत्र ने कहा, ‘यही कारण है कि हम सीजेआई के प्रशासनिक अधिकार को चुनौती देना चाहते हैं। हम जानना चाहते हैं कि क्या सीजेआई बिना किसी जुडिशल ऑर्डर के 5 जजों के बेंच का गठन का प्रशासनिक आदेश जारी कर सकते हैं, जबकि नियम यह है कि इस तरह के मामले की सुनवाई दो जजों या तीन जजों की बेंच के पास भेजा जाता है।’

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