सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को विदेशी चंदे पर केंद्र से जवाब मांगा

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सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को चंदा देने के कानून में किए गए संशोधन की वैधता जांचने का फैसला किया है। अदालत ने नए कानून को निरस्त करने की याचिका पर सोमवार को केंद्र से जवाब दाखिल करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की पीठ ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(एडीआर) की एक याचिका पर केंद्र को यह नोटिस जारी किया है। याचिका में विदेशी चंदा विनियमन कानून (एफसीआरए) में किए गए संशोधनों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह कानून संसद में वित्त विधेयक बनाकर पारित किया गया जिससे राज्यसभा में इस कानून की जांच नहीं हो सकी। एडीआर के संस्थापक सदस्य प्रो. जगदीप छोकर ने कहा सुप्रीम कोर्ट इन संशोधनों को जरूर निरस्त करेगा, क्योंकि यह अवैध और असंवैधानिक हैं। गौरतलब है कि संसद ने मार्च में बजट सत्र में वित्त विधेयक 2018 पारित किया था। इसमें एफसीआरए 2010 को संशोधित किया गया जिससे राजनीतिक दलों के लिए विदेशी धन लेने का रास्ता खुल गया। इस विधेयक ने वित्त कानून 2016 को संशोधित किया, जिससे एफसीआरए, 2010 खुद ही संशोधित हो गया और इससे विदेशी धन स्रोत की परिभाषा बदल गई। इस संशोधन से बड़े राजनीतिक दल बच गए।
संशोधन को निरस्त किया जाए : प्रशांत भूषण
याचिकाकर्ता के वकील अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि संशोधन से राजनीतिक दलों के लिए विदेश से बेहिसाब चंदा लेने के दरवाजे खुल गए हैं। इस संशोधन ने विदेशी चंदे को अब कानूनी बना दिया है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन निरस्त किया जाए। इस संशोधन से कई फर्जी कंपनियां भारत में खुल जाएंगी और चंदा देकर देश की राजनीति पर नियंत्रित करेंगी
पहले विदेशी चंदा लेने पर पूरी रोक थी
केंद्र सरकार के नए कानून के पहले राजनीतिक दलों को विदेश से चंदा लेने पर पूरी रोक थी। लेकिन कानून में संशोधन कर दलों को चंदा लेने पर लगी रोक हटा दी गई है, लिहाजा अब राजनीतिक दल विदेश से चंदा ले सकते हैं।
हाईकोर्ट ने दिया था कार्रवाई का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने इन दलों के खिलाफ मार्च 2014 में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को विदेशी चंदा लेने के मामले में छह माह में कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इस कार्रवाई की जद में कई बड़े दल थे।
1976 से लागू किया गया है नया कानून
वर्ष 2016 में हुए संशोधन, जो वर्ष 2010 से लागू होना था, कहता है कि कोई कंपनी जिसका शेयर पूंजी भारत में कुल निवेश का डेढ फीसदी से ज्यादा हो, वह कंपनी विदेशी कंपनी नहीं मानी जाएगी। हालांकि मार्च में पारित हुए विधेयक में नए संशोधन को 1976 से ही लागू किया गया है। यह वह तारीख है जब एफसीआरए अस्तित्व में आया था। हालांकि इस कानून को 2010 में निरस्त कर दिया गया था। लेकिन फिर भी सरकार ने इसे 2016 के कानून से संशोधित कर दिया था।

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