दिल्ली बनाम केन्द्र: आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला, जानिए 10 बड़ी बातें

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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पीठ बुधवार को दिल्ली में राज्य सरकार और केन्द्र के बीच प्रशासनिक नियंत्रण और राष्ट्रीय राजधानी में शासन चलाने को लेकर चल रही जंग पर अपना फैसला सुनाएगी। पिछले साल 6 दिसंबर को केजरीवाल सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ की गई अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली का प्रशासनिक नियंत्रण उप-राज्यपाल के हाथों में है। एक महीने तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया था। आइये जानते है इससे जुड़ी 10 अहम बातें-
1-दिल्ली बनाम केन्द्र के बीच जंग में कई बड़े वकील पूर्व एडिशनल सोलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह, कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम, पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने दिल्ली सरकार लिए बहस की।
2-हालांकि, केन्द्र ने पूरी तरह से इस दलील को खारिज कर दिया कि निर्वाचित सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में एग्जक्यूटिव पावर होना चाहिए।
3-फैसले से एक दिन पहले हाईकोर्ट के प्रशासनिक नियंत्रण पर फैसले के खिलाफ अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट जाने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को लिखते हुए उनसे सीएम कार्यालय में अधिकारियों में नियुक्ति पर सहमति लेने की अपील की।
4-केजरीवाल ने लिखा- यह हमेशा से परंपरा और औचित्य रहा है कि मुख्यमंत्री के निजी अधिकारी उनके पसंद से रखे जाते रहे हैं। यह हमेशा से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार रहा है कि वे अपने पसंद का स्टाफ रखे। हालांकि, दिल्ली में दुर्भाग्य से इस नियम का पालन नहीं किया जाता है।
5- मुख्यमंत्री ने आगे लिखा है- “ऐसी कई मामले हुए हैं जब उनकी पसंद के अधिकारियों को उनके ऑफिस में नहीं भेजा गया है। जबकि दूसरी तरफ जो अन्य अधिकारी लगातार हमारे साथ काम कर रहे हैं उन्हें बिना मेरी सहमित के ही दिल्ली से बाहर ट्रांसफर कर दिया गया।”
6-केजरीवाल ने कुछ अधिकारियों का उदाहरण दिया, जैसे- एम्स के पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी संजीव चतुर्वेद, जिन्हें उन्होंने दिल्ली सरकार में लाने के लिए कहा था। लेकिन केन्द्र ने कभी उनका ट्रांसफर नहीं किया। एम्स के करप्शन केस में चतुर्वेदी व्हिसलब्लोअर रहे थे।
7-मुख्यमंत्री ने ऑफिसर गीतिका शर्मा का उदाहरण दिया जो केजरीवाल की एडिशनल सेक्रेटरी थी। लेकिन, दो साल की भीतर ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया।
8-साल 2015 में दिल्ली की सत्ता में आम आदमी पार्टी के आने के बाद से ही यहां पर अधिकारों को लेकर दिल्ली सरकार और केन्द्र में जंग होती रही है।
9-विवाद इस वजह से है क्योंकि दिल्ली एक केन्द्रीय शासित प्रदेश है ना कि पूर्ण राज्य। जिसका नतीजा ये होता है कि दिल्ली सरकार का जमीन, सीनियर ऑफिसर्स की नियुक्तियों और पुलिसबलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। ये तीनों उप-राज्यपाल की ओर से नियंत्रित किए जाते हैं।
10- आप सरकार हमेशा उप-राज्यपाल ऑफिस पर उनकी परियोजनाओं में बाधा डालने का आरोप लगाती रही है। पार्टी के मुताबिक, उनके कुछ प्रोजेक्ट्स इसलिए प्रभावित हुए क्योंकि उनमें एलजी ने कथित तौर पर दखल दी जैसे मोहल्ला सभा, मोहल्ला क्लिनिक, बस एग्रीगेटर स्कीम और अस्पतालों में वेकेंसियों को भरना।

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