‘इमरान के आने पर कश्मीर में बढ़ सकता है प्रॉक्सी वार और घुसपैठ’

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पाकिस्तान की सियासत में इमरान खान के उभार का खाका वहां की सेना ने तैयार किया। जानकार मानते हैं कि लंबे समय से लोगों के बीच पैठ बनाने की उनकी कोशिश को सेना ने अपने समर्थन से फाइनल टच दिया। दरअसल नवाज का बीच-बीच में सेना को चुनौती देने का अंदाज सेना को रास नहीं आ रहा था। जब-जब सेना और नवाज शरीफ के बीच टकराव की खबरें आईं इमरान खान पाकिस्तान की सड़क पर बड़े आंदोलन की अगुवाई करते नजर आए। सुलह की कई कोशिशें भी हुईं। नवाज भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पाकिस्तान की जनता की सहानुभूति खो रहे थे। इसके चलते सेना को नवाज के खिलाफ पीटीआई को आगे बढ़ाने का मौका मिला।पूर्व विदेश सचिव शशांक के मुताबिक पाकिस्तान में सेना या तो स्वंय मुख्य भूमिका में रहती है या फिर उनका कोई मोहरा सत्ता में होता है। अगर दोनों स्थिति नहीं है तो पाकिस्तान में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। इस बार उन्होंने इमरान को मोहरा बनाया। उनकी सकारात्मक छवि लोगों के सामने पेश करने में सेना की बड़ी भूमिका रही। इमरान आधुनिक कट्टरपंथी चेहरा के तौर पर सेना की पसंद बने थे। शशांक का कहना है कि अगर कोई कहता है कि सेना ने इमरान का मुखर समर्थन नहीं किया तो उसे यह स्वीकार करना पड़ेगा कि अन्य दलों का विरोध करके सेना ने उनके लिए राजनीतिक प्लेटफॉर्म तैयार किया। शशांक के मुताबिक पाकिस्तान सेना के प्रति वहां के लोगों के मन में काफी सम्मान है। वे देश की एकता अखंडता के लिए पाक सेना को अहम किरदार मानते हैं। सेना ने गरीब वंचित तबके में काफी पैठ बनाई है। इसलिए सेना का राजनीति में दखल खूब चलता है। पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि पाक सेना में पंजाब का दबदबा रहता है लेकिन इस बार सेना ने पख्तून ख्वा के इमरान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पख्तून ख्वा के भी कई लोग सेना में अहम ओहदों पर रहे हैं। सामरिक मामलों के जानकार अशोक मेहता ने कहा कि डॉन में प्रमुखता से सेना और नवाज के बीच टकराव की खबर प्रमुखता से छापी थी। उसी समय यह अंदेशा हो गया था कि नवाज के दिन लदने वाले हैं। मेहता ने कहा कि इमरान पूरी तरह से फौज का मोहरा हैं। उनके लिए चुनाव को प्रभावित करने के आरोपों में मेहता दम मानते हैं। उन्होंने कहा कि इमरान को आधुनिक कट्टरपंथी चेहरे के तौर पर देखा जाता है। उन्हें उदारवादी धड़ा तालिबान खान कहता है। मेहता ने आशंका जताई कि इमरान के आने पर कश्मीर में प्रॉक्सी वार और घुसपैठ बढ़ सकती है।

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