भारतीय राजनीति के ‘अजातशत्रु’ अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे, 93 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में हुआ निधन

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अलौकिक व्यक्तित्व वाले पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का आज निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी कई सालों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लाल कृष्ण आडवाणी सहित भाजपा और अन्य पार्टी के नेता उनका हालचाल जानने एम्स पहुंचे थे। अटलजी के जाने से पूरा देश शोक में डूब गया है। अटलजी के निधन की खबर से देश की राजनीति को गहरा धक्का लगा है। वाजपेयी को गुर्दा (किडनी) नली में संक्रमण, छाती में जकड़न, मूत्रनली में संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे। वह पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही रह पाई। 1998 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीनों तक चली थी। 1999 में वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 सालों का कार्यकाल पूरा किया। पीएम मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि अटल जी आज हमारे बीच में नहीं रहे, लेकिन उनकी प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन, हर भारतीय को, हर भाजपा कार्यकर्ता को हमेशा मिलता रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके हर स्नेही को ये दुःख सहन करने की शक्ति दे। ओम शांति !

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