सालों से अंतरिक्ष पर इंसान को भेजना चाह रहा भारत, 2022 में हो सकेगा संभव

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भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने रविवार को जोर देकर कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के तहत ही अतंरिक्ष में मानव को भेजने के लिए गगनयान मिशन पूरा होगा। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री की ओर से की गई घोषणा अचानक नहीं है, बल्कि कई वर्षों से तैयार की गई रूपरेखा पर आधारित है। राघवन ने एक साक्षात्कार में कहा, ऐसा अचानक नहीं हो रहा है और न ही हम इस मिशन को संयोग से शुरू कर रहे हैं। हम पहले से ही इस मिशन की योजना को आकार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद इस मिशन को निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप पूरा करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कार्य योजना को आगे बढ़ाया है। भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलहाकार ने कहा कि अंतरिक्ष में मानवयुक्त यान भेजना आसान काम नहीं है, यह चुनौतीपूर्ण कार्य है। हालांकि इस मिशन के लिए उपयोग में आने वाली सभी तकनीकी जानकारी हमारे पास है। यह पूछे जाने पर कि कुछ वैज्ञानिकों ने गगनयान अभियान को पूरा करने में अमेरिका, रूस जैसे देशों का सहयोग लेने की सलाह दी है,राघवन ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिशन की प्रकृति ही गठजोड़ स्वरूप की होती है। वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा, दोनों देश इस क्षेत्र में अग्रणी है। ऐसे में इन देशों के साथ बातचीत स्वभाविक है। गगनयान मिशन पर आने वाले भारी खर्च के फायदे और ऐसे अभियान पर एक वर्ग की ओर से सवाल उठाने को लेकर उन्होंने कहा कि यह नया नहीं है। इसरो की पिछली सफलताओं के बीच भी ऐसे सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक दिनों में यह पूछा जाता था कि भारत अंतरिक्ष में राकेट भेजने के लिए क्यों इतना निवेश कर रहा है। लेकिन इसरो को इससे काफी लाभ प्राप्त हुआ।
राघवन ने कहा कि हम इस अभियान से हाल के समय में होने वाले फायदे और आने वाले समय में संभावित लाभ का अनुमान लगा सकते हैं। मानव सहित अंतरिक्ष अभियान को अगर स्टार्ट अप और उद्योग से जोड़ दिया जाए तब इसमें दुनिया में श्रेष्ठ प्रौद्योगिकी अभियान बनने की क्षमता है। भारत कई प्रौद्योगिकी और कलपुर्जों का आयात करता है। इस अभियान का इस्तेमाल हम स्थानीय उद्योग और विज्ञान को आगे बढ़ाने में कर सकते हैं । गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 72वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्रचीर से अपने संबोधन में कहा था कि साल 2022 तक गगनयान के माध्यम से अंतरिक्ष में भारतीय यात्री को भेजा जाएगा। अगर संभव हुआ तो उससे पहले ही, भारत गगनयान के जरिये अंतरिक्ष में तिरंगा लेकर जाएगा।

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