क्या सचमुच असद की हत्या कराना चाहते थे डोनल्ड ट्रंप?

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मशहूर अमरीकी पत्रकार बॉब वुडवर्ड की नई किताब में दावा किया गया है कि डोनल्ड ट्रंप ने एक बार अमरीकी रक्षा मंत्रालय को सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की हत्या के आदेश दिए थे.

वुडवर्ड की इस किताब किताब का नाम Fear: Trump in the White House है, जिसमें ट्रंप प्रशासन की कड़ी समीक्षा की गई है.

किताब में रक्षामंत्री जैम्स मैटिस के हवाले से कहा गया कि 2017 में सीरिया में हुए रासायनिक हमले के बाद ट्रंप ने असद को जान से मारने की मांग की थी.

हालांकि, ट्रंप ने इस सारे दावों को झूठा बताया है और कहा है कि ये सारे बातें लोगों को बरगलाने के लिए लिखी गई हैं.

ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने इस बारे में रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से ‘कभी चर्चा ही नहीं की.’ जेम्स मैटिस ने भी किताब के दावों को ख़ारिज किया है.

किताब में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने कई संवेदशील काग़ज़ात ट्रंप से सिर्फ़ इसलिए छिपा कर रखे ताकि कहीं वो उन पर दस्तख़त न कर दें.

किताब में ये भी लिखा है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप को ‘झूठा’ और बेवकूफ़ कहा था.

वुडवर्ड एक बेहद प्रतिष्ठित पत्रकार हैं. उन्होंने 1970 के दशक में वॉटरगेट स्कैम में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की भूमिका सामने लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

सबसे पहले इस किताब के कुछ अंश वॉशिंगटन में प्रकाशित हुए. इसके अगले दिन न्यूयॉर्क टाइम्स में इस विषय पर व्हाइट हाउस के एक अज्ञात वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से एक लेख छपा. लेख में अधिकारी ने कहा है कि प्रशासन की समस्याओं की जड़ राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की अनैतिकता है.

किताब के मुताबिक़, अप्रैल 2017 में सीरिया में हुए रासायनिक हमले के बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पेंटागन को सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की हत्या के इंतज़ाम करने के निर्देश दिए थे.

किताब में दावा किया गया है कि जेम्स मैटिस पहले ट्रंप की गुज़ारिश मान गए थे लेकिन बातचीत के बाद उन्होंने अपने एक सहयोगी से कहा कि वो ‘इनमें से कुछ’ भी नहीं करेंगे.

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में और अपने ट्वीट्स में किताब के दावों को पूरी तरह ख़ारिज किया है. उन्होंने बुधवार को मीडिया से कहा, “ऐसा कभी नहीं सोचा गया और नहीं ऐसा कभी सोचा जाएगा.”

उन्होंने वुडवर्ड की पूरी किताब को ही ‘मनगढ़ंत’ बताया है. रक्षामंत्री जेम्स मैटिस ने भी किताब को किसी की ‘बढ़िया कल्पनाओं से प्रेरित’ बताया है.

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