5 रुपये के पैरासिटामॉल के लिए कंपनियां वसूल रही हैं पांच गुना ज्यादा दाम

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केंद्र सरकार ने जब पिछले दिनों 328 फिक्स डोज कंबीनेशन यानी एफडीसी दवाओं पर रोक लगाई तो इस पर काफी बवाल मचा. कुछ दवा निर्माता कंपनियां कोर्ट भी पहुंच गईं और सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही सैरीडॉन समेत तीन दवाओं पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया. एफडीसी वो दवाएं हैं जो दो या दो से अधिक दवाओं के अवयवों (सॉल्ट) को मिलाकर बनाई जाती हैं. सरकार और विशेषज्ञों का तर्क है कि ये दवाएं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं. दूसरी तरफ, कंपनियां एफडीसी या अन्य ब्रांडेड दवाओं के लिए सामान्य से कहीं ज्यादा पैसे भी वसूलती हैं. सरकार इसके बरक्स जन औषधि केंद्र के जरिये जेनेरिक दवाओं को प्रमोट करने में लगी है.

जेनेरिक यानी वो दवाइयां जो किसी ब्रांड की तो नहीं हैं, लेकिन सॉल्ट और फायदे ब्रांडेड जितने ही हैं, लेकिन जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों के दाम में जमीन-आसमान का अंतर है. मसलन बुखार में इस्तेमाल होने वाले एक्लोफिनैक और पैरासिटामॉल सॉल्ट की जो टैबलेट जेनेरिक में 5 रुपये 70 पैसे का है, ब्रांड के नाम पर कंपनियां उसके लिए 23-30 रुपये तक वसूल लेती हैं. इसी तरह एक्लोफिनैक के 3 रुपये 84 पैसे के टैबलेट के लिए 32.50 तक वसूला जाता है. कैंसर आदि की दवाओं के रेट में तो चार से पांच गुना ज्यादा का अंतर है. सरकार ने खुद जन औषधि केंद्र की वेबसाइट पर जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के दाम में अंतर की सूची जारी की है.

केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से जेनेरिक दवाएं ली जा सकती हैं. सभी राज्यों के जिलों और प्रमुख शहरों में जन औषधि केंद्र खोले गए हैं. दिल्ली की बात करें तो यहां 41 स्टोर हैं. इसी तरह उत्तर प्रदेश में 472 स्टोर खुल चुके हैं. केंद्र सरकार लगातार नए केंद्र खोल रही है. पिछले दिनों खबर आई थी कि देशभर के पेट्रोल पंप और रेलवे स्टेशन पर भी जन औषधि केंद्र खोलने की तैयारी है. आप अपने नजदीकी स्टोर की जानकारी इस लिंक से ले सकते हैं.

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