अफगानिस्तान में सिखों व हिदुओं की हालत काफी खराब : हामिद करजई

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अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा कि अफगानिस्तान में सिखों, हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों की हालत वर्ष 1992 के बाद बेहद नाजुक हुई है। जब बाबरी मस्जिद भारत में गिराई गई उस के बाद वहां अल्पसंख्यकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। आज साउथ एशिया में स्थायी शांति के लिए भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को संयुक्त कोशिशें करनी होंगी। करजई ने वीरवार देरशाम श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेका। शुक्रवार को वह जालियांवाला बाग गए अौर शहीद स्‍मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। हामिद करजई श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेककर काफी प्रसन्‍न नजर आए। इस दौरान करजई ने एक बेशकीमती गलीचा और वास श्री हरिमंदिर साहिब के लिए भेंट की। एसजीपीसी के मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह ने श्री हरिमंदिर साहिब का सुनहरा मॉडल, पुस्तकें , सिरोपा और लोई देकर करजई को सम्मानित किया।

करजई ने कहा कि उनके मन की इच्छा थी कि वह भारत जाएंगे और पंजाब में श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्‍तक होंगे। यहां आ कर उनको आत्मिक शांति हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में बहुत बड़े व्यापार और अन्य कारोबारों पर सिखों और हिंदुओं का एकाधिकार था। व्यापार यही दो समुदाय सब से अधिक करते थे। जब वह राष्ट्रपति थे उस वक्त सरकार में भी सिखों को प्रतिनिधित्व दिया गया था। आज अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत ठीक नहीं है।करजई ने कहा कि साउथ एशिया में शांति बनाए बिना इस क्षेत्र का आर्थिक विकास संभव नहीं है। इस लिए भारत और अफगानिस्तान को पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारत के साथ अफगानिस्तान कृषि, बागबानी और ड्राई फ्रूट के व्यापार व टेक्नालॉजी को बढावा दे कर आर्थिक मजबूती के रास्ते में आगे बढ सकते है इस के लिए साउथ एशिया में शांतिमय माहौल होना जरूरी है। यह सब कुछ बड़ी राजनीतिक पहलकदमी से ही हो सकता है।

उन्होंने कहा कि वह श्री हरिमंदिर साहिब में शांति की प्रार्थना करने के लिए आए हैं। दोनों देशों के संबंध बढिय़ा हो इस के लिए उन्होंने अरदास की है। वह हमेशा ही अफगानिस्तान में रहने वाले सिख व हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पहलकदमी करते रहे है। इस दौरान एसजीपीसी के मुख्य सचिव डा. रूप सिंह ने अफगानिस्तान में रह रहे सिखों की हालत के संबंध में भी जानकारी हासिल की।

करजई शुक्रवार को जालियांवाला बाग पहुंचे और वहां शहीदाें को श्रद्धांजलि दी। उन्‍हाेंने जालियांवाला बाग के पूरे परिसर का मुआयना किया। उन्‍होंने उस स्‍थान को भी देखा जहां आज भी गाेलियों के निशान है। वह शहीद स्‍मारक व संग्रहालय में भी गए और जालियांवाला बाग गोलीकांड के बारे में दिए गए आलेख पढ़े। गोलीकांड के बारे में पढ़कर वह भावुक हो गए।

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