अब मुरली विजय का चीफ सिलेक्‍टर पर हल्‍ला बोल, पूछा- चयन का क्‍या पैमाना है

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भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्‍य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद के खिलाफ सुर लगातार तेज होते जा रहे हैं. करुण नायर के बाद अब सलामी बल्लेबाज मुरली विजय ने उन पर हल्‍ला बोला है. विजय ने कहा कि इंग्‍लैंड दौरे पर तीसरे टेस्‍ट से बाहर किए जाने के बाद उनसे किसी ने बात नहीं की. एक अंग्रेजी अखबार से विजय ने कहा, ‘तीसरे टेस्‍ट मैच से बाहर किए जाने के बाद न तो मुख्‍य चयनकर्ता और न ही किसी अन्‍य व्‍यक्ति ने मुझसे बात की. इसके बाद किसी ने मुझ से कोई बात नहीं की. इंग्‍लैंड में टीम मैनेजमेंट के सदस्‍यों से जरूर बात हुई बस इसके अलावा कुछ नहीं.’

वहीं विजय के बयान पर मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने हैरानी जताई. उन्‍होंने कहा कि यह आधारहीन बात है. प्रसाद ने कहा, ‘जहां तक मुरली विजय को बाहर करने के बाद उनसे संवादहीनता की बात है तो मैं भी हैरान हूं कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा जबकि मेरे साथी चयनकर्ता देवांग गांधी ने उन्हें सूचित कर दिया था कि किन कारणों से उन्हें बाहर किया जा रहा है.’

विजय ने कहा कि चयन का क्‍या पैमाना है यह तो बताना चाहिए. खिलाड़ी को बाहर किए जाने की वजह तो बतानी चाहिए जिससे कि उसे अपनी कमी का पता रहे. हालांकि उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि ऑस्‍ट्रेलिया दौरे के लिए वह वापसी करने में कामयाब रहेंगे.

बता दें कि विजय ने इंग्‍लैंड दौरे पर पहले दो टेस्‍ट में 20, 6, 0 और 0 रन की पारियां खेली थीं. इसके बाद उन्‍हें बाहर कर दिया गया था. वेस्‍ट इंडीज के खिलाफ सीरीज से भी उन्‍हें बाहर रखा गया है. हालांकि टीम इंडिया से बाहर किए जाने के बाद काउंटी क्रिकेट में एसेक्‍स के लिए उन्‍होंने 56, 100, 85, 80 और 2 रन की पारियां खेली हैं.

प्रसाद की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय समिति पहले ही आलोचकों के निशाने पर है क्योंकि करूण नायर ने खुलासा किया था कि उन्हें लगातार छह टेस्ट मैचों से बाहर रखने के बाद बाहर किए जाने के बारे में न तो टीम प्रबंधन (मुख्य कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली) और न ही चयनकर्ताओं ने उनसे बात की.

पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह ने भी चयनकर्ताओं की आलोचना की थी. वहीं धवन को बाहर किए जाने पर प्रसाद ने कहा कि उन्‍हें इसलिए बाहर किया गया क्योंकि वह सीमित ओवरों की फॉर्म को टेस्ट में नहीं दोहरा पाए.

उन्होंने कहा, ‘शिखर सीमित ओवरों की क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है लेकिन लंबे प्रारूप में वह इसे नहीं दोहरा पाया. हमने भारत ए और घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बना रहे पृथ्वी शॉ और मयंक अग्रवाल को मौका देने का फैसला करने से पहले उन्हें (धवन) पर्याप्त मौके दिए.’

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