ईरान पर US प्रतिबंध: बोला भारत, तेल आपूर्ति की समस्या नहीं, पर कीमतें बढ़ेंगी

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ईरान पर अगले महीने से लागू होने वाले अमेरिकी प्रतिबंधों के शुरू होने से पहले भारत ने कहा है कि तेल की उपलब्धता की समस्या बड़ी नहीं है बल्कि एक बड़े तेल सप्लायर को खोने के डर के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और इसके आगे और भी बढ़ने की आशंका है। बड़े तेल सप्लायर पर प्रतिबंधों के कारण बाजार का सेंटिमेंट भी खराब हुआ है।

ईरान से तेल खरीदने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट मांगने के सवाल को टालते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह इस बारे में देश की राय रख चुके हैं और उन्हें इसपर कुछ और नहीं कहना है।

पिछले हफ्ते प्रधान ने कहा था कि दो सरकारी रिफाइनरी ने ईरान से नवंबर के लिए 1.25 मिलियन टन ऑइल इंपोर्ट बुक किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मई में ईरान के साथ 2015 में हुए न्यूक्लियर समझौते से हाथ पीछे खींच लिए थे। इसके बाद ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे।

ईरान पर कुछ प्रतिबंध 6 अगस्त को लागू हो गए थे। तेल और बैंकिंग सेक्टर्स को प्रभावित करने वाले प्रतिबंध चार नवंबर से लागू होंगे। इन प्रतिबंधों के लागू होने के बाद ईरान से तेल खरीदने के लिए डॉलर में भगुतान करना मुश्किल हो जाएगा।

प्रधान ने इंडिया एनर्जी फोरम में संवाददाताओं से कहा, ‘कच्चे तेल की उपलब्धता का मुद्दा नहीं है। लेकिन दुनिया के अलग-अलग हिस्से में जियोपॉलिटकल अनिश्चितता के कारण मामला सेंटिमेंट का बन गया है। यही प्राइमरी चैलेंज है।’ मार्केट में अभी सेंटिमेंट यह है कि एक बड़े तेल उत्पादक देश से सप्लाई नहीं होगी। इसके कारण तेल की कीमतों में तेजी आ रही है और बाजार में अस्थिरता है।

इस महीने के शुरू में कच्चे तेल का दाम 86.74 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था जो चार साल में सबसे ज्यादा था। प्रधान ने कहा कि तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक पर यह जिम्मेदारी है कि वह बाजार में स्थिरता बनाए रखे। इससे तेल आयातक और निर्यातक दोनों को फायदा होगा।

प्रधान ने कहा कि गत जून में ओपेक ने हर रोज दस लाख बैरल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया था। इसके अलावा रूस और सऊदी अरब ने भी तेल का उत्पादन बढ़ा दिया था। उन्होंने कहा, ‘हमारी जानकारी के अनुसार ओपेक के कुछ देश अभी भी अपने लक्ष्य से पीछे हैं।’

भारत ने 2018-19 में ईरान से 25 मिलियन टन क्रूड का कॉन्ट्रैक्ट किया था, यह पिछले साल 2017-18 के 22.6 मिलियन टन की तुलना में ज्यादा था। अब अगले महीने से ईरान पर प्रतिबंध लागू होने से स्थितियां बदल जाएंगी। सऊदी अरब ने सोमवार को कहा था कि वह भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझता है और इसे पूरी करने के लिए वह हरसंभव कोशिश करेगा।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खपत करने वाला देश है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 फीसदी आयात करता है। इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान भारत को तेल सप्लाई करने वाला तीसरा बड़ा देश है। ईरान भारत की तेल जरूरतों का 10 फीसदी हिस्सा पूरी करता है।

पिछले सप्ताह प्रधान ने कहा था कि इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन और मेंगलोर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स ने मिलकर ईरान से 1.25 मिलियन टन कच्चा तेल आयात करने का समझौता किया था।

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