रावण के पुतलों के जलाने से होने वाले प्रदूषण पर रिपोर्ट तैयार करे सरकार

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दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत से कुछ दिन पहले ही प्रदूषण बढ़ना शुरू हो जाता है और उसी दौरान दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार भी आते हैं. ऐसे में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा है कि दशहरे के दौरान जलने वाले रावण के पुतलों से होने वाले प्रदूषण पर कमेटी बनाकर रिपोर्ट तैयार करे.

पहले ही प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली में दिवाली और दशहरे के दौरान पटाखों से होने वाला प्रदूषण आग में घी का काम करता है. यही वजह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया है जो यह तय करे कि तीन-चार महीने के दौरान सर्दियों में त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण पर किस तरह से काबू किया जाए.

दिल्ली हाईकोर्ट वायु प्रदूषण से जुड़ी उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें राज्य में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर सरकार और एजेंसी से नियंत्रण की मांग की गई है. सोमवार को भी सुनवाई में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि दशहरे के दौरान ही दिल्ली में करीब दस हजार रावण के पुतले जलाए जाते हैं. पुतलों में बड़ी संख्या में पटाखे भी होते हैं जिससे दशहरे के दौरान दिल्ली में प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है.

इस मामले पर चिंतित हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि 2 दिन बाद ही दशहरा है, लिहाजा इस साल तो कोर्ट कुछ भी करने में असमर्थ है, लेकिन अगले साल के दशहरे से पहले केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को मिलकर इसका स्थायी समाधान ढूंढना होगा.

अब दिल्ली और केंद्र सरकार को 22 नवंबर से पहले एक कमेटी का गठन करना होगा जिसका काम यह तय करना होगा कि त्योहारों के दौरान पटाखों के अलावा और कौन-कौन से मुख्य कारण है जिससे प्रदूषण और बढ़ रहा है. साथ ही उन कारणों को किस तरह से कम किया जा सकता है.

इस पर भी कमेटी को गाइडलाइंस बनानी होंगी. हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि पिछले साल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अब भी दिल्ली सरकार और तमाम एजेंसीज को लागू करना होगा जिसमें पटाखों की बिक्री पर रोक का प्रावधान है.

प्रदूषण को मापने वाली तमाम एजेंसियों के डाटा भी इस बात की पुख्ता पुष्टि कर चुके हैं कि दशहरा और दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से दिल्ली में प्रदूषण का स्तर कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है. दिल्ली में पहले ही और राज्यों से आने वाली प्रदूषित हवा सांसों में जहर भर रही होती है जिसमें खेतों में पराली का जलाया जाना भी मुख्य कारण है.

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