बिहार में किताब की नई राजनीति, किताबों के जरिए आरोप-प्रत्यारोप का नया खेल शुरू

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बिहार की आजकल राजनीति और राजनीतिज्ञों पर किताब लिखने की होड़ लगी हुई है. लगता है कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले काफी संख्या में ऐसी किताबें बाजार में दिखने लगेंगी.

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ‘लालू लीला’ नाम की किताब लिखकर इसकी शुरुआत की तो दूसरी कड़ी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक किताब का मंगलवार को लोकार्पण हुआ. ‘नीतीश कुमारः संसद में विकास की बातें’ किताब का लोकार्पण राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने किया.

किताब नीतीश कुमार की अपने संसदीय काल में संसद में दिए गए भाषणों का संग्रह है. किताब के लोकार्पण के मौके पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी मौजूद थे.

सुशील मोदी की इसी महीने ‘लालू लीला’ नाम की किताब का लोकार्पण हुआ. इस किताब में उन्होंने लालू परिवार के भ्रष्टाचार की गाथा लिखी है जो उनके 2017-18 में 40 पत्रकार सम्मेलन में किए गए खुलासों का संग्रह है.

सुशील मोदी ने इस किताब के जरिए यह बतान की कोशिश की है कि रेल मंत्री रहते लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने सेल कंपनियों के जरिए संपत्ति बनाई. ‘लालू लीला’ किताब बाजार में अच्छा कर रही है. खुद सुशील मोदी ने कहा कि किताब ब्लैक में मिल रही है क्योंकि प्रकाशक उसकी आपूर्ति नहीं कर पा रहा है.

‘लालू लीला’ किताब के आने के बाद आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने भी ऐलान किया कि वो भी नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर किताब लिखेंगे. उनकी किताब का नाम होगा ‘नीतीश सुशील लीला’. तेजप्रताप ने कहा कि अपनी किताब के जरिए वे सुशील मोदी को एक्सपोज करेंगे.

बिहार विधान परिषद के उपभवन स्थित सभागार में आयोजित ‘नीतीश कुमार: संसद में विकास की बातें’ पुस्तक के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह ही नीतीश कुमार में भी निर्णय लेन का साहस हैं. नीतीश कुमार में हिम्मत है कि वे पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने और शराबबंदी जैसे असाधारण निर्णय ले सकें. मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने बड़ी लकीर खींच दी है, जिसकी बराबरी शायद अगले 20-25 वर्षों में भी कोई नहीं कर पाए.

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