बिहार में नियमों के विरूद्ध कई विधायकों को आवंटित है बंगला, कुछ पर है जबरन कब्जा

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आशुतोष चंद्रा/पटनाः बिहार की सियासत में बंगला प्रकरण अब तूल पकडने लगा है. माननीयों को हुए बंगला आवंटन में बड़े पैमाने पर मनमानी सामने आयी है. ज़ी मीडिया ने जब बिहार के माननीयों को आवंटित बंगलों का रियलिटी चेक की, तो कई चौकानेवाले मामले सामने आए हैं. न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्ष के भी कई ऐसे विधायकों के नाम समाने आए हैं, जिन्हें नियम से अलग बंगला आवंटित किया गया है. जो उस बंगले के हकदार नहीं.

बंगला आवंटन का मुद्दा बिहार की सियासत में कई दिनों से छाया हुआ है. और इसके आगे भी छाये रहने की उम्मीद है. क्योंकि बिहार के विधायकों को आवंटित किये गये बंगले में नियमों की जमकर अनदेखी की गयी है. अब जरा बिहार विधानसभा सदस्य आवास आवंटन नियमावली 2000 पर नजर डालिये.

बिहार में सरकारी आवासों का आवंटन तीन तरीकों से होता है. विधानसभा पूल, विधान परिषद पूल और सेंट्रल पूल. तीनों पूल को A,B,C,D और E ग्रुप में बांटा गया है.

ए ग्रुप में जिन लोगों को बंगला मिलना है उनमें सरकारी कर्मचारी, फर्स्ट टर्म वाले विधायक शामिल हैं.

बी ग्रुप में जिन लोगों को बंगला मिलना है उनमें एडीएम, डिप्टी सेक्रटरी, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, दूसरे और तीसरे टर्म के विधायक शामिल हैं.

सी ग्रुप के बंगले सेक्रटरी, प्रिंसिपल सेक्रटरी, चौथे और पांचवें टर्म के विधायक जो विधानसभा के समितियों के सभापति रहे हों. उनको आवंटित करने का प्रावधान हैं.

डी ग्रुप के बंगले वैसे लोगों को आवंटित किये जाने का प्रावधना है पूर्व में उपाध्यक्ष, उप सभापति, राज्य मंत्री, उपमंत्री एवं संसद सचिव रह चुके हों और कम से कम तीन बार निर्वाचित हो चुके हों. या छह बार से अधिक विधायक रहे हों.

ई कैटेगरी के बंगले उन लोगों को आवंटित किये जाने का प्रावधान है. जो पूर्व में राज्यपाल, मुख्य मंत्री, केन्द्रीय मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, सभापति, मंत्री का पद धारण कर चुके हो और कम से कम तीन बार निर्वाचित या मनोनित हुए हो.

पूर्व मंत्री आरजेडी नेता प्रोफेसर चन्द्रशेखर कहते हैं कि नियम तो बने हुए हैं, लेकिन नियमों का पालन किसी भी स्तर पर नहीं होता. लेकिन हैरत की बात यह है बिहार में कई विधायक ऐसे हैं जिन्होंने फर्स्ट टर्म के साथ ही डी और ई टाईप का बंगला अपने प्रभाव से हथिया लिया है.

जेडीयू से पहलीबार विधायक बने विद्यासागर निषाद को डी कैटेगरी का बंगला आवंटित किया गया है. उसी तरह से पहली बार विधायक बने कांग्रेस विधायक सुदर्शन को भी वीआईपी पूल का बंगला आवंटित है. आरजेडी से पहली बार विधायक बने अरुण यादव को भी ई टाईप के बंगले में रह रहे हैं.

पहली बार आरजेडी से एमएलसी बने कमर आलम भी डी टाईप बंगला ले चुके हैं. जबकि जेडीयू से पहली बार विधायक बने मेवालाल चौधरी, शेखपुरा विधायक रंधीर सोनी भी डी टाईप बंगले में रह रहे हैं. पूर्व विधायक अनंत सिंह अपने पहले ही टर्म से ई टाईप बंगले में रह रहे हैं. वहीं बीजेपी विधायक ज्ञानेन्द्र ज्ञानू भी अपने दूसरे टर्म से ही वीवीआईपी पूल के बंगले में रह रहे हैं.

कांग्रेस एमएलसी प्रेमचन्द्र मिश्रा कहते हैं कि विधायक किसी भी पार्टी का हों उसे बंगला नियम के अनुसार ही मिलना चाहिए.

वहीं, बिहार सरकार के भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी बंगला आवंटन में गड़बड़ी की बात को सिरे से खारिज करते हैं. महेश्वर हजारी की माने तो जिन विधायकों को जो बंगला आवंटित किया गया है वो नियम के मुताबिक ही है.

बहरहाल, तेजस्वी यादव को लेकर उठे बंगले का विवाद आगे भी जारी रहेगा. क्योंकि सरकारी बंगले नियम के मुताबिक बंटे नहीं हैं और विपक्ष इसी अनियमितता को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाने की तैयारी कर रहा है.

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