बजरंग-विनेश भारतीय कुश्ती के नए सितारे बनकर उभरे, सुशील कुमार जूझते दिखे

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भारतीय कुश्ती के लिए साल 2018 शानदार रहा, जिसमें बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट ऐतिहासिक पदकों के साथ इस खेल के नए सितारे बनकर उभरे तो सुशील कुमार और साक्षी मलिक जैसे ओलंपिक पदक पहलवान लय पाने के लिए जूझते दिखे. पहलवानों के लिए अच्छी खबर यह भी रही कि साल खत्म होने से पहले राष्ट्रीय महासंघ लगभग 150 खिलाड़ियों को अनुबंध प्रणाली के तहत ले आया. यह पहली बार है जब भारतीय पहलवानों को महासंघ से केंद्रीय अनुबंध मिला है.

बजरंग और विनेश ने पदक जीतने के साथ जिस तरह से पूरे साल प्रदर्शन किया वह और भी शानदार था. उनके प्रदर्शन से दो साल से कम समय में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में कुश्ती में भारत के लिए पहले स्वर्ण पदक की आस जगा दी है. ओलंपिक की बात करें, तो भारत के लिए दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाले एकमात्र पहलवान सुशील कुमार और ओलंपिक पदक जीतने वाली देश की पहली और एकमात्र महिला पहलवान साक्षी मलिक के लिए यह साल निराशाजनक रहा.

सुशील ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जरूर जीता, लेकिन वहां उन्हें टक्कर देने वाला को कोई दमदार पहलवान नहीं था. साक्षी राष्ट्रमंडल खेलों के साथ एशियाई खेलों में भी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहीं. गोल्डकोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य जीतने वाली साक्षी ने भी माना कि उन्हें मानसिक तौर पर और मजबूत होने की जरूरत है.

सुशील एशियाई खेलों के पहले ही दौर में हारकर बाहर हो गए, लेकिन वह इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि उनका दमखम में कमी आई है. वह टोक्यो ओलंपिक में एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं. गोंडा में अभी हाल ही में हुई राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में हालांकि इन खिलाड़ी को कोई खास टक्कर नहीं मिली और दोनों ने अपने-अपने भार वर्ग में परचम लहराया.

बजरंग और विनेश ने जिस तरह से राष्ट्रमंडल खेलों के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किए वह अपने आप में खास था. कुश्ती में एशिया का दबदबा माना जाता है और ऐसे में एशियाई पहलवानों को मात देकर खिताब जीतना बड़ी उपलब्धि है. विनेश चोट के कारण पदकों की फेहरिस्त में विश्व चैम्पियनशिप को शामिल नहीं कर सकीं, तो वहीं बजरंग ने इस टूर्नामेंट में रजत पदक हासिल कर साल के सभी बड़े टूर्नामेंटों में पदक जीतने का कारनामा किया. फाइनल में उनकी हार ने कमजोर डिफेंस को उजागर किया. जापान के ताकुतो ओतोगुरो ने लगातार उनके दाएं पैर पर हमला किया जिसका बजरंग के पास कोई जवाब नहीं था.

अन्य फोगाट बहनों में ऋतु, संगीता, बबीता और गीता के लिए भी यह साल कुछ खास नहीं रहा, लेकिन जिस एक खिलाड़ी ने भारतीय कुश्ती में अपनी पहचान बनाई- वह है पूजा ढांडा. राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली इस खिलाड़ी ने विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया. वह ऐसा करने वाली चौथी भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं. उनसे पहले अलका तोमर, गीता और बबीता ने विश्व चैम्पियनशिप में पदक हासिल किया था.

भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआइ) ने टाटा मोटर्स के साथ मुख्य प्रायोजक के तौर पर करार किया, जिसका फायदा 150 पहलवानों को केंद्रीय अनुबंध के रूप में मिला. इसमें ए ग्रेड के खिलाड़ियों को 30 लाख रुपये दिए जाएंगे. इस ग्रेड में पहले बजरंग, विनेश और पूजा का नाम था, लेकिन बाद में महासंघ ने सुशील और साक्षी का नाम इसमें जोड़ा.

इसके साथ ही डब्ल्यूएफआई पहली बार इस खेल में दबदबा रखने वाले ईरान के कोच की सेवाएं लेने में सफल रहा. ईरान के होसैन करीमी, अमेरिका के एंड्रयू कूक और जॉर्जिया के तेमो काताराशिविलि से डब्ल्यूएफआई ने एक साल का करार किया है.

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