अधिकारियों की कारगुजारी का दंश झेल रहे नियोजित शिक्षक

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यह आम कहावत है कि ‘‘खेत खाए गदहा और मार खाए जोलहा’। ये कहावत चरितार्थ हो रही है राज्य के नियोजित शिक्षकों पर। कभी आवंटन की समस्या तो कभी जांच के कारण तो कभी वेतन निर्धारण का बहाने वेतन का भुगतान नहीं होने से पर्व त्योहार भी राज्य के नियोजित शिक्षकों के लिए फीके हो गए हैं। नया साल भी उनके लिए कोई खास उत्साहवर्धक नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार द्वारा जारी की गयी विभिन्न योजनाओं की राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र महालेखाकार कार्यालय को जमा नहीं करने के कारण पैसे व आवंटन रहने के बाद भी ट्रेजरी लॉक के कारण निकासी नहीं हो रही है। हद तो यह कि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, पटना के उस फरमान पर भी घोर विरोध जताया है। जिसमें पटना जिला के सभी विद्यालयों के प्रधानों का वेतन रोकने का आदेश जारी किया गया है। जबकि सच्चाई यह है कि अधिकांश विद्यालयों ने विभिन्न लाभुक योजनाओं से संबंधित सूची तथा पूर्व का उपयोगिता प्रमाण पत्र जिला शिक्षा कार्यालय में जमा कर दिया। उन्हें भी इस आदेश की मार झेलनी पड़ रही है। बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी अभिषेक कुमार ने इसे शिक्षा विभाग की लालफीताशाही और अफसरशाही करार दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता का नतीजा है कि शिक्षा विभाग को विभिन्न योजनाओं के लिए मिली राशि का समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र महालेखाकार कार्यालय को जमा नहीं करने के कारण पैसे व आवंटन रहने के बाद भी ट्रेजरी लॉक के कारण निकासी नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत शिक्षकों को भी पिछले पांच माह से वेतन नहीं मिल पाया है,तो अतिथि शिक्षकों को नियुक्त के बाद से आज तक बोहनी भी नहीं हुआ है।

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