भीमा कोरेगांव / रैली में 5 लाख लोग हो सकते हैं शामिल, 7000 सुरक्षा जवान तैनात; पिछले साल भड़की थी हिंसा

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पुणे. भीमा-कोरेगांव में हुए युद्ध के 201 साल पूरे होने के मौके पर दलित संगठन मंगलवार को रैली करेंगे। शौर्य दिवस के रूप में मनाए जाने वाले इस कार्यक्रम में पांच लाख लोगों के हिस्से लेने की संभावना है। रैली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए इलाके में 7000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से भी नजर रखी जा रही है। यहां पिछले साल एक जनवरी को भी रैली हुई थी, तब उसमें हिंसा भड़क गई थी, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी।

पुणे के डीएम नवलकिशोर राम ने बताया कि भीमा-कोरेगांव के विजय स्तंभ पर एक जनवरी को पांच लाख लोगों के जुटने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से कहीं इलाके में कोई अव्यवस्था न फैले इसके लिए 500 सीसीटीवी, 11 ड्रोन कैमरे और 40 वीडियो कैमरे लगाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और बाबासाहेब अंबेडकर के पौत्र आनंद राज अंबेडकर रैली को संबोधित करेंगे।

1200 लोगों के खिलाफ कार्रवाई

विजय स्तंभ के आसपास हिंसक हालात बनने से रोकने के लिए पुलिस ने पहले ही 1200 से ज्यादा लोगों के खिलाफ प्रिवेन्टिव एक्शन लिए हैं। इनमें कबीर कला मंच के कई एक्टिविस्ट और दक्षिणपंथी नेता मिलिंद एकबोटे के संगठन से जुड़े लोग शामिल हैं। इन लोगों को भीमा कोरेगांव से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सोशल मीडिया पर भी नजर

पुणे (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल ने बताया कि रैली से पहले सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले कई संदेश देखे गए। इसके बाद अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ एहतियातन कार्रवाई की है। इसके साथ ही 12 एसआरपीएफ की कंपनियां (स्टेट रिजर्व पुलिस फोर्स), रैपिड एक्शन फोर्स, होमगार्ड्स, सात बम डिस्पोजल स्क्वाड की टीम को तैनात किया गया है।

भीमा-कोरेगांव का इतिहास

1818 में हुई लड़ाई में ब्रिटिश सेना, जिसमें बड़ी संख्या में महार सैनिक शामिल थे, ने पेशवा या ब्राह्मण शासकों को हराया था। इस मौके पर लाखों दलित हर साल एक जनवरी को विजयस्तंभ पर इकट्ठा होते हैं। यह लड़ाई इतिहास में भीमा-कोरेगांव के नाम से जानी जाती है। इसी उपलक्ष्य में दलित संगठन यहां हर साल कार्यक्रम करते हैं।

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