दर्जनभर सांसदों को वेंकैया ने सदन से निकला, LS से AIADMK के 26 MP सस्पेंड!

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संसद के दोनों सदनों में आज कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके के सांसद हंगामा करते रहे और वेल में आकर नारेबाजी करते रहे। राज्यसभा में डीएमके के चार सांसद भी इस हंगामे में शामिल रहे। इससे नाराज सभापति वेंकैया नायडू ने सदन की कार्यवाही पहले दो बार फिर दोपहर तीन बजे के करीब दिनभर के लिए स्थगित तो कर दी लेकिन उससे पहले सभापति ने नियम 255 के तहत तमिलनाडु के (दोनों दलों के) करीब दर्जनभर सांसदों को सदन से बाहर निकलने का फरमान सुनाया। बता दें कि नियम 255 सभापति को अधिकार देता है कि सदन की गतिविधियों में गतिरोध फैलाने वाले सदस्य को सदन से निकाला जा सकता है।

उधर, लोकसभा में भी एआईएडीएमके के सांसद दिनभर नारेबाजी करते रहे और वेल में आकर विरोध-प्रदर्शन करते रहे। राफेल पर चर्चा के दौरान भी ये सदस्य हंगामा करते रहे। इससे नाराज स्पीकर ने एआईएडीएमके के 26 सांसदों को दिनभर के लिए सदन से सस्पेंड कर दिया। तमिलनाडु के ये सांसद कावेरी मुद्दे पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे थे। दरअसल, कर्नाटक सरकार ने कावेरी नदी पर मेकेदतु में बांध बनाने का फैसला किया है। इससे तमिलनाडु को कम पानी मिलने का अंदेशा है। इससे तमिलनाडु में खेतीबारी पर बुरा असर पड़ सकता है। तमिलनाडु के सभी सांसद इस डैम का विरोध कर रहे हैं और केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप चाहते हैं।

जब सदन में संसदीय कार्य मंत्री विजय गोयल और सभापति वेंकैया नायडू ने विपक्षी सांसदों से जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी को बयान देने के लिए शांति की अपील की तब भी ये लोग हंगामा करते रहे। इतना ही नहीं डीएमके के चार सांसद भी उस हंगामे में शामिल हो गए। इससे नाराज नायडू ने नितिन गडकरी को सदन में बयान देने से मना करवा दिया और इन सासंदों को सदन से बाहर निकाल दिया। उधर, एआईएडीएमके सांसद और लोकसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर एम थंबीदुरई ने आरोप लगाया है कि चुनावों को देखते हुए भाजपा ने कर्नाटक सरकार को कावेरी नदी पर डैम बनाने की अनुमति दी है ताकि भाजपा कर्नाटक में कुछ सीटें जीत सके। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और वो करते रहेंगे।

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