पीएम का झारखंड दौरा: 2022 तक हर देशवासी के सिर पर होगी पक्की छत

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मंडल डैम सहित छह अन्य परियोजनाओं की आधारशिला रखने पलामू पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रघुवर दास को ऊर्जावान मुख्यमंत्री कहकर सम्बोधन किया। कहा आपसब इस विकास यात्रा के भागीदार। 2019 की यात्रा शुरू है। नीलाम्बर पीताम्बर की भूमि को नमन करते। पीएम आवास योजना के 25 हजार लाभार्थी को बधाई। घर पक्का होता है तो संकल्प भी पक्का होता है। किसानों से जुड़ी साढेतीन हजार करोड़ की योजना का शिलान्यास का मौका है। लागत कम तो खेती का फायदा। तीन लाख लोगों को पीने के पानी का भी फायदा होगा। पहले की सरकारों ने क्या किया मंडल डैम योजना गवाही दे रही।

1973 में फाइलें चली, लटकती रही लटकती रही। क्या किसी बांध परियोजना में आधी शताब्दी लगनी चाहिए। किसानों के से ठगी और आपराधिक लापरवाही हुई है। 20 करोड़ की योजना की लागत 80 गुना बढ़ गई। वो किसानों, जनता, बिहार, झारखण्ड के गुनहगार। ऐसे लोगों के खिलाफ लडऩा चाहिए या नही। वे किसानों को वोटबैंक समझते थे। हमारे लिए अन्नदाता हैं। इतने सालों से लटकना छोटी बात नही।तब बिहार झारखण्ड की एक ही सरकार थी। काम नहीं किया।

राजनीतिक कारणों से राज्यों में पानी की लड़ाई लड़ी जा रही और पानी समंदर में जा रहा। बिहार और झारखंड के सीएम और सांसदों को एकमत राय, सहमति केलिए बधाई दी। सांसदों का विशेष अभिनन्दन। दूसरे राज्यों को भी इससे सीखने की जरूरत।

कुछ लोग किसानों की कर्ज माफी को ले झूठ बोल रहे। मंडल डैम समय पर पूरा होता तो यहां के किसान कर्ज में डूबते क्या। आज कर्ज के नामपर दुकानदारी कर रहे। कर्ज देने की स्थिति में होता किसान। उत्तर कोयल नहीं कई परियोजना जो अधूरी रही। हमारी सरकार ने बड़ी अधूरी योजनाओं की सूची बनाई। जिनकी फाइलें भी खो गई थीं। 99 फीसद पर हम काम कर रहे। एक लाख करोड़ का प्रावधान किया। वोट बैंक की राजनीति करनी होती तो इस पैसे से कर्ज माफ कर दिया होता। लोगों ने मजबूर बनाकर रखा। ताकि वोट बैंक बने रहें। कर्ज माफी से सिर्फ एक पीढ़ी को राहत। हमारी योजना पीढिय़ों तक किसान को मजबूत बनाएगी। देश के उज्ज्वल भविष्य केलिए किसानों को ताकतवर बनाना है।

2022 तक देश का गांव हो या शहर इसके लिए हमारी सरकार ने योजना शुरू की। शहर केलिए अलग, गांव केलिए अलग।नाम नहीं काम होना चाहिए पहले सिर्फ नाम पर योजनाएं बनती थी। कहां गई योजनाएं, कहां गए घर। घर देने में बड़े बड़े खेल होते थे। पूछा किसी को आवास योजना केलिए रिश्वत देने पड़े। हमारे यहां बिचौलियों केलिए जगह नहीं है। पीएम आवास योजना में सबसे पहले यही सुधार किया। पूरी पारदर्शिता लाई। पहले गरीबों के नाम कटे दलालों की चले खेल होता था। अब सीधे गरीबों के खाते में पैसा जाता है। पहले घर ऐसे बनते थे कि लोग जाना नहीं चाहते थे। गुणवत्ता ध्यान रखने केलिए हमने मजबूत मॉनीटरिंग व्यवस्था की। कोई भी उसे देख सकता है । घर शौचालय गैस की व्यवस्था की।

आज जो हमपर कीचड़ उछाल रहे, मैडम जब रिमोट से सरकार चला रही थी 5 साल में 25 हजार घर बने हमने 5 साल से कम में सवा करोड़ घर बना दिए। यह हमारी कार्य संस्कृति। पहले 18 माह में घर बनते थे अब 12 माह में। पहले घर, गाड़ी, दुकान…. उनके नाम पर। हमने किया, पीएम आवास में घर महिला मुखिया के नाम पर। जिन्हें घर नहीं मिला है, उन्हें भी मिलेगा।

खूंटी की बहनों से बात हुई, रानी मिस्त्री से पहले दूसरों केलिए शौचालय बनवाए बाद में अपने लिए घर बनाए। आयुष्मान योजना से रोज दस हजार लोगों को लाभ मिल रहा है । न्यू इंडिया योजना से सब के लिए व्यवस्था कर रहा हूं।

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