मानसिक रोगों की नहीं कर सकते अनदेखी

0
208

सूबे के स्वास्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में मानसिक बीमारियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। राज्य सरकार, स्वस्थ बिहार बनाने को संकल्पित है। उक्त बातें मंगल पांडेय ने रविवार को इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी, बिहार स्टेट ब्रांच द्वारा होटल मौर्या में आयोजित 22वें वार्षिक अधिवेशन में कहीं। इससे पहले उन्होंने कंसल्टेशन लायसन साइकेट्री थीम पर आधारित इस एक दिवसीय कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान उन्होंने बिहार समेत बाहर से आये लगभग 100 मनोचिकित्सकविशेषज्ञों का उत्साहवर्धन भी किया। इस वार्षिकोत्सव में लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने अपनी भव्य प्रस्तुति दी। वहीं, इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी के राष्ट्रीय सचिव डा. विनय कुमार ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में मानसिक बीमारियां मुख्य रूप से सामने आ रही हैं। इन बीमारियों की वजह से काम करने की क्षमता, उत्तम जीवन शैली प्रभावित होती है। बिहार साइकेट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डा. उदय कुमार सिन्हा ने कहा कि समाज में मानसिक बीमारियों के बारे में गलत अवधारणा इसे छिपा लेना है। इससे मानसिक बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति और अधिक प्रभावित होते हैं। उनकी हालत दयनीय हो जाती है। हालांकि मानसिक बीमारियों से होने वाले आर्थिक और सामाजिक नुकसान का कोई मापदंड नहीं है। लेकिन समाज में मानसिक बीमारियों को अभिशाप समझने से यह अभिशाप बन जाती है।बिहार साइकेट्रिक सोसाइटी की सचिव डा. नुपूर निहारिका ने कहा कि इस बीमारी से बच्चे, नवयुवक और नवयुवतियां भी प्रभावित हैं। लगभग 9.8 मिलियन (नौ लाख अस्सी हजार) भारतीय युवा 13-17 साल की उम्र में मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। आज इसके तेजी से बचाव की जरूरत है। देश में मानसिक स्वास्य सेवा के लिए प्रयास के हुए अध्ययन से मालूम पड़ता है कि इसके उपचार में कमी ही सभी मानसिक बीमारियों का मुख्य कारण है। आज चार में से तीन लोग गंभीर रूप से पीड़ित हैं। काम करने की कठिनाइयों की वजह से सामाजिक और पारिवारिक जीवन अच्छी तरह से नहीं जी पाते हैं। बिहार साइकेट्रिक सोसाइटी के डॉ. पीके सिंह ने कहा कि यह बीमारी देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय है। मानसिक रोग विशेषज्ञ और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक विशेषज्ञ और साइकेट्रिक नर्स का न होना इन बीमारियों के उचित उपचार में बाधक है। आज सांस्थानिक देखभाल की कमी है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। इस वार्षिक सम्मेलन के आग्रेनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. सीएस शर्मा ने कहा कि हमारा प्रयास होगा कि इस दिशा में बदलाव लायें। इसके अलावा बिहार साइकेट्रिक सोसाइटी के एडिटर डॉ. मनीष कुमार ने भी इस क्षेत्र में समग्र सेवा प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।उधर, इस कार्यक्रम में इस साल से दो अवार्ड की शुरुआत की गई है। पहला, डॉ. एलपी वर्मा लाइफ टाइम अचीवमेंट नेशन अवार्ड देश के प्रख्यात मनोचिकित्सक डॉ. श्रीधर शर्मा को दिया गया, वहीं दूसरा डॉ. आरपीएन सिन्हा नेशन अवार्ड देश के एक अन्य प्रख्यात मनोचिकित्सक डा.अरविंदो एन चौधरी को दिया गया। कार्यक्रम में दिल्ली से आये डॉ. श्रीधर शर्मा, एम्स दिल्ली के डॉ. प्रताप शरण, एम्स भुवनेश्वर के डॉ. विश्वरंजन मिश्रा, इंग्लैंड से आये डॉ. बख्शी नीरज, एम्स पटना के डॉ. पंकज, डॉ. राजीव, डॉ. राजेश, डॉ. केके सिंह ने भी अपने विचार रखे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.