संभल : संभल जिले के गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के गांव में 2 सगी बहनों के शव पेड़ से लटके मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई. इन सगी बहनों के शव पेड़ से लटके होने की खबर इलाके में तेजी से फैली. बताया जा रहा है कि ये सगी बहनें रविवार रात से घर से गायब थीं. लोगों की ओर से दोनों लड़कियों की हत्या की आशंका जताई जा रही है. गांव में 2 सगी बहनों के शव मिलने की घटना से पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है. सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों लड़कियों के शवों को पेड़ से उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए. वहीं पुलिस लड़कियों की मौत की इस घटना को खुदकुशी बता रही है. पुलिस का कहना है कि खुदकुशी की वजह इन्‍हें किसी बात पर पड़ी डांट भी हो सकती है. घटना संभल जनपद के गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के गांव धूमना दीपपुर की है, इसी गांव के किसान रामवीर की बेटी कविता और सीमा देर शाम अचानक घर गायब हो गई थीं. परिजन देर रात तक कविता और सीमा खोजने का प्रयास करते रहे, लेकिन दोनों लड़कियां नहीं मिलीं. सोमवार सुबह कुछ ग्रामीण खेतों पर काम करने के लिए पहुंचे तो जंगल में दोनों लड़कियों के शव एक पेड़ से लटके हुए दिखाई दिए थे. इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई. साथ ही पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है.

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बीजेपी की बंगाल इकाई के प्रमुख दिलीप घोष ने अपने उस बयान पर सफाई दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बंगाल से कोई प्रधानमंत्री हो सकता है तो वो तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं.

घोष ने रविवार को अपनी सफाई में कहा कि ‘मुझे पता है कि उनका (ममता बनर्जी) सपना कभी पूरा नहीं होने वाला है लेकिन राजनीति में सबकुछ मुमकिन है. ममता बनर्जी का यह कोरा सपना है क्योंकि टीएमसी का बंगाल के बाहर कोई अस्तित्व नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘मेरे से एक सवाल पूछा गया था जिसके जवाब में मैंने कहा कि ममता बनर्जी अगर पीएम बनती हैं तो मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं लेकिन ऐसी कोई संभावना नहीं है. मेरी इस बात को हंसी-मजाक में लेना चाहिए.’

गौरतलब है कि अभी हाल में घोष ने कहा था कि ‘अगर बंगाल से पीएम पद का उम्मीदवार चुना जाए तो ममता बनर्जी की अच्छी संभावनाएं हैं. वो देश का अगला प्रधानमंत्री बनने का सपना भी देख रही हैं. हम चाहते हैं कि वो फिट रहें ताकि वे अच्छा काम कर सकें. लेकिन सच तो ये है कि नरेंद्र मोदी एक बार फिर 2019 में प्रधानमंत्री बनेंगे.’ घोष के इस बयान के बाद बंगाल से लेकर बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति तक में भी घमासान मच गया. बीजेपी नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया देने के बजाय चुप्पी साधना मुनासिब समझा लेकिन घोष ने रविवार को सफाई देकर पार्टी की और किरकिरी होने से बचा लिया.

घोष के बयान पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद इदरिस अली ने कहा, ‘अगर घोष ने दिल से ऐसा बयान दिया है तो उन्हें हार्दिक बधाई और अगर मजाक में कहा है तो उन्हें भूलना नहीं चाहिए कि वे जो चाहते हैं उसके बारे में कोई कुछ नहीं सोचेगा.’ अली ने कहा, ‘आप (घोष) हमेशा वाहियात बातें करते हैं और मुझे नहीं पता कि आपके दिमाग में हमेशा क्या चलता रहता है लेकिन देश का आम आदमी यही चाहता है कि ऐसा शासक मिले जो सरकार चलाना जानता हो और जो हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई के बीच समान भाव रखता हो. ऐसा सिर्फ ममता बनर्जी में है.’

घोष के बयान पर बीजेपी नेता रूपा गांगुली ने कहा कि ‘उन्होंने व्यंग्य में ऐसा बोला. बीजेपी के एक-एक कार्यकर्ता को पता है कि ममता बनर्जी को पीएम बनने का अवसर नहीं मिलेगा. मोदी और ममता के बीच कोई लड़ाई ही नहीं है. किसी ऐसी महिला के बारे में बयान दिया गया जो एक प्रदेश तक ठीक से नहीं संभाल पा रही, उनके पास प्रदेश से बाहर कोई भरोसेमंद नेता तक नहीं है और वो प्रधानमंत्री बनने के बारे में सोच रही हैं.’

गांगुली ने आगे कहा, ‘ममता बनर्जी के पीएम बनने के कोई चांस नहीं हैं. आपको किसी व्यक्ति की विश्वसनीयता समझनी होती है. बनर्जी बंगाल के सबसे बड़े पद पर जरूर हैं लेकिन यहां की सबसे बड़ी नेता नहीं हैं.’

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