CBI के बहाने कैसे ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा…

0
94

मोदी सरकार और सीबीआई के खिलाफ जंग छेड़ने से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी और इस बैठक में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार भी शामिल हुए थे. यह कहना है सूत्रों का.

सीबीआई के करीब 40 अधिकारी रविवार शाम को राजीव कुमार के घर उनसे पूछताछ के लिए पहुंचे. इसके विरोध में ममता बनर्जी ने सीबीआई के खिलाफ धरना दे दिया कि जरूरी औपचारिकताओं को पूरा किए बिना सीबीआई उनके अधिकारी से पूछताछ कैसे कर सकती है. ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है.

टीएमसी का आरोप है कि सीबीआई बिना किसी वारंट के राजीव कुमार से पूछताछ करना चाह रही थी. इस वजह से कोलकाता पुलिस ने कुछ सीबीआई अधिकारियों को हिरासत में ले लिया.

घटना की सूचना मिलते ही ममता बनर्जी राजीव कुमार के आवास पहुंच गईं. यह बीजेपी और सीबीआई दोनों के लिए ही चौंकाने वाला था. वह संविधान की रक्षा के लिए धरने पर बैठ गईं. उन्होंने पीएम मोदी पर राज्य सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया. हालांकि उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि इसमें कुछ भी एक्सीडेंटल नहीं था.

सूत्र ने बताया, ‘यह तय माना जा रहा था कि सीबीआई राजीव कुमार को गिरफ्तार कर सकती है. रविवार की घटना मुख्यमंत्री की नजर में सीबीआई द्वारा अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश थी.’ उन्होंने आगे कहा, ‘बैठक में इस पर चर्चा हुई कि बीजेपी राजीव कुमार को गिरफ्तार करने की पूरी कोशिश करेगी और संघीय ढांचे पर राज्य सरकार और कोई हमला बर्दाश्त नहीं करेगी. इसके लिए योजना बनाई गई.’

सूत्रों के मुताबिक, प्लान बना कि केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाया जाएगा. सीएम के एक करीबी सूत्र ने कहा, ‘बहुत कम नेता ऐसे हैं जिन्हें ममता की तरह स्ट्रीट फाइट में महारत हासिल है. सीएम का लॉन्ग टर्म प्लान हमेशा से यही रहा है कि बीजेपी को अपनी शर्तों पर वन ऑन वन स्ट्रीट फाइट में खींचा जाए.’

ममता की तरफ से संदेश जाना था कि टीएमसी के प्रदेशभर के कार्यकर्ता हरकत में आ गए. प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए, ट्रेनें रोकी गईं और सोमवार सुबह तक प्रदेश के कई हिस्सों में मोदी और अमित शाह के खिलाफ पोस्टर लगा दिए गए थे.

रविवार को आधी रात तक ममता बनर्जी को विपक्ष के लगभग हर नेता का समर्थन मिल चुका था. बीजद, शिवसेना और पीडीपी जैसी पार्टियां जो ममता की रैली में शामिल नहीं हुई थीं उन्होंने भी ममता का समर्थन किया.

इससे पहले नोटबंदी के दौरान 2016 में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि राज्य सरकार को जानकारी दिए बिना केंद्र ने प्रदेश में सेना की तैनाती कर दी. इसे एक असंवैधानिक कदम के तौर पर देखा गया.

वहीं एक बार पहले भी ममता देर रात प्रदर्शन कर चुकी हैं. तब वह राज्य सचिवालय के अंदर देर रात तक बैठी रही थीं. उस प्रदर्शन और इस धरने में केवल टाइमिंग का अंतर है.

टीएमसी के एक नेता ने कहा, “चुनाव के लिए अब कुछ ही हफ्ते बाकी है. ममता ने एंटी-मोदी राजनीति में अपनी जगह बना ली है. इस वजह से पूरे देश की नजर उन पर टिकी हुई है.”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.