सम्मान निधि के नाम पर किसानों को मामूली रकम देना अपमान: मायावती

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बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के नाम पर गरीब किसानों को हर माह 500 रुपये देने को अपमान बताया है। उन्होंने कहा है कि नोटबंदी और जीएसटी की तरह यह भी सही कहा जाए तो अपरिपक्व फैसला है।

मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गोरखपुर में बड़े तामझाम के साथ इस योजना की शुरुआत की है। इस योजना में कुछ गरीब किसानों को 500 रुपये महीना अर्थात 17 रुपये प्रतिदिन देने की व्यवस्था है। यह मेहनतकश किसान समाज का सम्मान नहीं बल्कि अपमान करने जैसा है। खेती व किसानी की दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही समस्याओं से निपटने के मामले में भाजपा सरकार की छोटी व अपरिपक्व सोच का यह जीता-जागता प्रमाण है। किसानों को इससे सतर्क रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत कुछ किसानों को तीन किश्तों में सालाना मात्र 6,000 रुपये देना किसानों का खुला अपमान है। किसान देश का सबसे बड़ा मेहनतकश समाज है। इनको थोड़ी सी सरकारी मदद देने की भाजपा सरकार की सोच अनुचित ही नहीं बल्कि अहंकारी है। किसान समाज सबसे पहले अपनी फसल का लाभकारी मूल्य चाहता है और जिस वायदे को पूरी करने में भाजपा की सरकार विफल साबित हुई जो कि खुली वादा खिलाफी भी है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि वैसे तो भाजपा की केंद्र सरकार ने सत्ता का लगातार दुरुपयोग किया है। इसका असली प्रमाण नोटबंदी और जीएसटी है।

लोकसभा चुनाव के समय में नरेंद्र मोदी सरकार अपनी ऐसी खराब व शरारतपूर्ण मानसिकता से बाज नहीं आ रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को समुचित विचार-विमर्श के बाद संतोषजनक तरीके से लागू किया जाता तो बेहतर होता। वैसे भी चुनाव के समय में इस प्रकार की लुभावने वाले व छलावापूर्ण रवैये को आमजनता कतई पसंद नहीं करती है।

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