अभिनंदन की रिहाई भारत के दबाव की अहम भूमिका रही, सैन्य तैयारी की समीक्षा का सही समय

0
63

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को रिहा करने का एलान किया है। बुधवार को पाकिस्तानी वायुसेना के दुस्साहस का जवाब देते हुए अभिनंदन का मिग-21 विमान हादसे का शिकार हो गया था और वह नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाके में पहुुंच गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव एक तरह से चरम पर पहुंच गया। अभिनंदन की रिहाई के एवज में पाकिस्तान ने भारत से सौदेबाजी की तमाम कोशिशें तो कीं, लेकिन भारत सख्त रवैये के साथ अपने इस बिगड़ैल पड़ोसी के दबाव में नहीं आया।

आखिरकार इमरान खान को पाकिस्तान की संसद में अभिनंदन की रिहाई का एलान करना पड़ा। हालांकि इसे वह शांति की दिशा में एक कदम बढ़ाने वाली पहल के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं, लेकिन इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि भारत के दबाव की इसमें अहम भूमिका रही। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में भी पाकिस्तान के लिए अभिनंदन को रिहा करना अपरिहार्य तो था ही वहीं भारत के मौजूदा कड़े रुख को देखते ऐसा न करने पर पाकिस्तान को इसकी बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ सकती थी।

अभिनंदन की वापसी राष्ट्रीय आकांक्षा बन गई थी और उनके सकुशल स्वदेश लौटने के साथ इस प्रकरण का सुखद पटाक्षेप भी हो जाएगा। मगर इसके साथ ही कुछ प्रश्न हमारे सामने खड़े होते हैं कि अभिनंदन इस हादसे के शिकार क्यों बने? इसके लिए वायुसेना के अरसे से लंबित आधुनिकीकरण की अनदेखी को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। राजनीतिक हितों के लिए कुछ दल राफेल जैसे विमानों की खरीद में अवरोध पैदा करते हैं। इसकी कीमत अभिनंदन जैसे बहादुर सैनिकों को चुकानी पड़ती है, क्योंकि वह वही मिग-21 विमान उड़ान रहे थे जो उड़ते हुए ताबूतों के रूप में कुख्यात हो गया है। यह तो उनकी काबिले तारीफ क्षमताओं का कमाल था कि उन्होंने उसी विमान से पाकिस्तान के बेहद सक्षम माने जाने वाले एफ-16 विमान को मार गिराया।

अभिनंदन की आड़ में पाकिस्तान ने भारत के मनोबल पर प्रहार का प्रयास तो किया, लेकिन इसका उसे कड़ा प्रतिकार भी झेलना पड़ा। ऐसे में हमें यह समझना होगा कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़नी है तो हमें ऐसी घटनाओं और मानवीय सहित अन्य क्षति को झेलने एवं सहन करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होना होगा। इस बीच एक प्रश्न यह भी है कि क्या हम मानते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में सफलता हमें बिना कोई कीमत चुकाए मिल जाएगी? भारतीय वायुसेना पाकिस्तान को उसकी सीमा में जाकर सबक सिखा आए और वह चुपचाप बैठा रह जाएगा? पाकिस्तान को अपने अवाम को दिखाने के लिए कुछ कार्रवाई तो करनी ही थी। वह आगे भी ऐसा कर सकता है और जब करेगा तो भारत को भी करारा जवाब देना होगा। उनमें अभिनंदन जैसी दूसरी घटनाएं भी हो सकती हैं।

ऐसे में हमें यह विचार करना होगा कि दृढ़ संकल्प तथा हर संभावित क्षति को सहने एवं डटे रहने की सामूहिक मानसिकता वाला देश ही आतंकवाद को खत्म करने का लक्ष्य पा सकता है। पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाएं अवश्य संकट में हैं, लेकिन वहां की सेना का रुतबा एवं उसकी ताकत बची हुई है। हर मोर्चे पर भारत से कमजोर होने के बावजूद पाकिस्तानी फौज अपनी हरकतों से बाज नहीं आती।

जम्मू-कश्मीर में एफ 16 विमानों से सैनिक ठिकानों पर हमले का दुस्साहस भी कुछ ऐसा ही था। यह तो हमारे सुरक्षा बलों की सजगता और बहादुरी थी कि उन्होंने तुरंत उन्हें खदेड़ दिया, लेकिन यदि हमारे पास और उन्नत विमान होते तो दुश्मन को और कड़ा जवाब दिया जा सकता था और हमें क्षति भी नहीं उठानी पड़ती। ऐसे में यह सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर चर्चा का भी उपयुक्त समय है। मिग विमानों पर काफी समय से सवाल उठ रहे हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड उनके उन्नयन का अपेक्षित काम कर नहीं पा रही है। फिर भी हमारे सैनिक उनसे काम चला रहे हैं।

कल्पना कीजिए कि हमारे बेड़े में राफेल जैसे विमान जुड़ जाएं तो दुश्मन की क्या दशा होगी? अभी तक की अपनी कार्रवाई से भारत ने यही संदेश दिया है कि वह सीमापार आतंकवाद पर प्रहार करने में सक्षम है। पाकिस्तान को सुबूत सौंप उसकी कार्रवाई के इंतजार में भारत अब मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। भारत की इस स्पष्ट रणनीति से पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि अगर भविष्य में वह कोई धृष्टता करेगा तो भारत कड़ाई से उसका जवाब देगा। भारत का यह दृष्टिकोण बड़ा बदलाव है। साफ है कि कोई भी परिवर्तन बिना किसी बलिदान या कीमत के अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकता।

हालांकि पाकिस्तान की कार्रवाई को युद्ध भी माना जा सकता है। भारत ने केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया और पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों या आम नागरिकों को नहीं। इसके उलट पाकिस्तान की कार्रवाई का लक्ष्य भारतीय सैन्य ठिकाने थे। यह बात अलग है कि वे सफल नहीं रहे। कूटनीतिक स्तर पर भी विदेश मंत्रालय ने भारत में पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को तलब कर बिना उकसावे के भारतीय वायु सीमा का अतिक्रमण करने पर आपत्ति पत्र सौंप दिया है। इसमें साफ लिखा है कि भारत ऐसे आक्रमण या सीमापार आतंकवाद से अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का अधिकार रखता है।

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसकी धरती से संचालित आतंकवादी शिविरों के खिलाफ कार्रवाई पर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दायित्व और द्विपक्षीय प्रतिबद्धता दिखाने के बजाय भारत के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखा रहा है।

इस तरह भारत ने मान्य तरीके के अनुरूप पहला कदम उठाया है। इसके बाद पाकिस्तान कोई हरकत करेगा तो फिर सीधे जवाब का विकल्प सुरक्षित है। प्रधानमंत्री ने स्वयं तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक कर उन्हें खुली छूट की दोबारा घोषणा कर दी है। ऐसे में हमें राजनीतिक नेतृत्व के साहसिक निर्णय और सेना की रणनीति एवं शौर्य पर भरोसा करना चाहिए। फिर भी अगर हम छोटी-मोटी क्षति, किसी कदम के तत्काल प्रतिकूल परिणाम आने, शीघ्र सफलता न मिलने या कुछ समय के लिए प्रतिद्वंद्वी का पलड़ा भारी होने से विचलित होने लगेंगे तो इस लंबी लड़ाई में जीत नहीं पाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय नियमों और मर्यादाओं का पालन करने वाले देश के नाते भारत की हर कार्रवाई और हर कदम के साथ कुछ सीमाएं रहेंगी, जबकि आतंकवाद पर हमारे आरोप को न स्वीकार करने वाला पाकिस्तान किसी भी सीमा तक जा सकता है। आखिर इमरान ने सेंट्रल कमान की बैठक क्यों बुलाई जिसमें नाभिकीय कमान ढांचा भी शामिल है? यह इमरान के शांति प्रस्ताव के विपरीत है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.