होली के रंग अपने आप में बहुत खास होते हैं। हर रंग के अपने अलग ही मायने होते हैं। होली के रंगों की दुनिया बड़ी ही लुभावनी होती है। प्रत्येक रंग का अपना एक अर्थ और महत्व होता है। रंगोंका मनुष्य के शरीर से नहीं उसकी, मनः स्थिति से भी गहरा रिश्ता है। वे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अपना प्रभाव डालते हैं। होलिका दहन 20 मार्च को होगा, वहीं होली 21 मार्च को खेली जाएगी और एक-दूसरे को रंग लगाया जाएगा।

होली पर खेले जाने वाले रंगों का महत्व
लाल
होली के मौके पर सबसे ज्यादा जिस रंग का प्रयोग किया जाता है, वह है लाल रंग। लाल रंग उल्लास और शुद्धता का प्रतीक है। लाल रंग का प्रयोग हर शुभ अवसर पर किया जाता है। दरअसल लाल रंग अग्नि का द्योतक है और ऊर्जा, गर्मी और जोश का प्रतिनिधित्व करता है, इस लिहाज से होली के दौरान होलिका दहन, मौसम में गर्मी का आगमन, त्योहार मनाने में जोश का संचार तो होता ही है, साथ ही साथ हर वर्ग के लोगों में ऊर्जा का प्रवाह होता है।

पीला
पीला रंग ज्योति का पर्याय माना जाता है। इसको देखने से मन में प्रकाश, ज्ञान का आभास होता है। इसका मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ता है और मन अध्यात्म की ओर उन्मुख हो जाता है। देवी-देवताओं को अधिकतर पीला वस्त्र ही पहनाया जाता है। यह रंग समृद्धि और यश को इंगि त करता है। इसका मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

हरा
यह राहत पहुंचाने वाला रंग है। संतुलित और सहज है। यह रंग शाति का प्रतीक है और मन की चंचलता को दूर करता है। हरा रंग जीवन का द्योतक है। इसके साथ ही यह प्रकृति का सबसे प्यारा रंग है।

नीला
नीला रंग शांति, गंभीर और स्थिरता का संकेतक है। हालांकि होली में नीला रंग कम प्रयोग में आता है। जल और वायु का रंग नीला माना गया है, इस लिहाज से यह रंग प्राण और प्रकृति से संबंधित है। नीला रंग पूर्णता को इंगित करता है। यह रंग मानसिक शांति प्रदान करता है। यह रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है।

नारंगी रंग
यह रंग प्रसन्नता और सामाजिकता का घोतक है। वे लोग जो अपने सामाजिक संबंधों की उष्मता को बनाए रखना चाहते हैं, नारंगी रंग पसंद करते हैं। इस रंग का अधिक उपयोग करने वाले व्यक्ति विचारवान होते हैं। इससे मानसिक शक्ति को भी वढ़ावा मिलता है।

बैंगनी रंग
इस रंग का अधिक प्रयोग व्यक्ति को परिष्कृत अभिरुचियों की ओर संकेत करता है। यह रंग भी कल्पना प्रधान है। इसका असर जादू-सा होता है। रहस्य को छिपाए हुए यह रंग बलिदान की प्रवृत्ति की ओर भी व्यक्ति को उन्मुख कर सकता है। प्राचीन काल में यह रंग धैर्य और बलिदान के लिए उपयोग में लाया जाता है। यह प्रायश्चित और तप का भी प्रतीक माना गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.