नई दिल्ली, हम सभी ने बचपन में निबंध की पुस्तक में एक लाइन जरूर पढ़ी होगी, आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। साफ पानी पिलाने वाली कंपनी केंट आरओ सिस्टम्स की सफलता के पीछे की भी यही कहानी है। इस कंपनी के फाउंडर को कंपनी खोलने और इस मशीन को दुनिया के सामने लाने के पीछे का आइडिया कहां से आया हम अपनी इस खबर में आपको विस्तार से बता रहे हैं।

केंट आरओ की कहानी: कंपनी के फाउंडर महेश गुप्ता के लिए वर्ष 1998 काफी मनहूस रहा। इस वर्ष महेश के दो बच्चे बीमार हुए और उनकी मौत हो गई। अपने बच्चों की मौत से उन्हें गहरा सदमा लगा। बच्चों की मौत के बाद उन्हें वाटर प्यूरीफायर की अहमियत समझ आने लगी, लेकिन उस वक्त बाजार में उपलब्ध वॉटर प्यूरीफायर की गुणवत्ता से वो संतुष्ट नहीं हुए। इसी बीच केंट आरओ का आइडिया उनके दिमाग में आया। पेशे से इंजीनियर गुप्ता ने अपनी मेहनत के दम पर अपने आइडिया को सफल करके दिखाया।

कानपुर आईआईटी से पास आउट हैं गुप्ता: कानपुर आईआईटी से स्नातक गुप्ता बताते हैं कि उस वक्त बाजार में जितने भी वॉटर प्यूरीफायर मौजूद थे वो अल्ट्राआवायलेट तकनीक पर काम करते थे। यह तकनीक पानी में घुली हुई गंदगी को साफ करने में सक्षम नहीं थी। इसी बीच उन्होंने रिवर्स ऑस्मोसिस की शुरुआत की। गुप्ता को इस बात को भलीभांति जानते थे कि भारत में होने वाली अधिकांश बीमारियों की जड़ पीने के साफ पानी की उपलब्धता का न होना है। यानी उन्होंने वक्त रहते मार्केट में इस संभावना को भांप लिया।

मात्र 5 लाख रुपये से की बिजनेस की शुरुआत: महेश ने अपने बिजनेस की शुरुआत मात्र 5 लाख रुपये के साथ की थी। जगह और पैसों की कमी के कारण शुरुआत में उन्होंने एक छोटे से गैराज से कंपनी की शुरुआत की। शुरुआती साल में उनकी कंपनी मात्र 100 प्यूरीफायर ही बेच पाई। उस वक्त इसकी कीमत 20 हजार रुपये थी, जबकि बाकी की कंपनियों के प्यूरीफायर 5 हजार रुपये की कीमत के आस पास बिक रहे थे। लेकिन कहते हैं न कि समय बदलते देर नहीं लगती। वर्ष 2016-17 में कंपनी का टर्नओवर 850 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वर्ष 2017-18 में यही टर्नओवर 950 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। कंपनी को उम्मीद है कि अगले वर्ष में उसका टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाएगा।

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