नई दिल्लीः कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी परंपरागट सीट अमेठी के साथ इस बार केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ने जा रहे हैं. आज उन्होंने वायनाड सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है. इस सीट के जरिए कांग्रेस की कोशिश है कि दक्षिण भारत के मतदाताओं को साध लिया जाए क्योंकि दक्षिण भारत की कई सीटों पर वायनाड की सीट के चुनाव का असर देखा जाएगा. वजह है कि वायनाड लोकसभा सीट केरल के साथ कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा को छूती है.

गांधी परिवार का वायनाड से है खास रिश्ता
जानकारी के लिए बता दें कि वायनाड ही दक्षिण का काशी के नाम से मशहूर है. वायनाड में थिरुनेली महा विष्णु मंदिर है जिसे दक्षिण का काशी कहा जाता है. दक्षिण के इस काशी वायनाड से गांधी परिवार का खास रिश्ता है. गांधी परिवार के वायनाड से खास रिश्ता इसलिए भी है कि राहुल गांधी के पिता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अस्थियां पापनाशिनी नदी में विसर्जित की गई थीं. इस नदी के किनारे ही थिरुनेली महा विष्णु मंदिर स्थित है.

2014 में पीएम मोदी ने काशी से चुनाव लड़ा, 2019 में राहुल गांधी ‘दक्षिण के काशी’ से लड़ेंगे
इसके अलावा वायनाड सीट से राहुल गांधी के चुनाव लड़ने के साथ एक दिलचस्प तथ्य और है कि साल 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने काशी (वाराणसी) से चुनाव लड़ा था और 2019 में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ‘दक्षिण के काशी’ से चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

वायनाड की है एक और खासियत
वायनाड केरल का एकमात्र जिला है जिसकी सीमाएं दक्षिण के तीन राज्यों को छूती हैं. केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमाओं को छूने वाला इस जिले में होने वाली हर राजनीतिक हलचल का इन तीनों राज्यों पर असर देखा जाएगा.

वायनाड के बारे में कुछ और दिलचस्प तथ्य
वायनाड में केरल का एकमात्र लव-कुश मंदिर है और यहां इकलौता ऐसा मंदिर है जिसकी जैन धर्म के अनुयायी पूजा करते हैं. वायनाड की कुल जनसंख्या 13 लाख 25 हजार 788 है और यहां प्रमुख रूप से कॉफी, चाय, कोको, काली मिर्च और इलायची
का उत्पादन होता है.

राहुल गांधी के सामने हैं ये उम्मीदवार
वायनाड सीट पर वामदलों के गठबंधन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने पीपी सुनीर को जबकि एनडीए ने भारत धर्म जन सेना (BDJS) के अध्यक्ष तुषार वेल्लापल्ली को अपना उम्मीदवार बनाया है. 2009 में वायनाड सीट अस्तित्व में आई थी. उसके बाद हुए दोनों ही लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की.

वायनाड लोकसभा सीट कब बना
केरल का वायनाड लोकसभी सीट 2009 में बना. इस सीट को कांग्रेस की सुरक्षित सीटों में से एक माना जाता है.
तीन जिलों की संगम है ये सीट
वायनाड लोकसभा के तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इनमें से तीन वायनाड ज़िले के, तीन मल्लापुरम ज़िले के और एक कोझीकोड ज़िले से हैं. विधानसभा सीटें- मानाथावाडी, सुल्तानबथेरी, कल्पेट्टा, थिरुवंबाडी, एननाड, नीलांबुर और वांडूर.

क्या है इस सीट पर समीकरण
वायनाड सीट में हिंदू आबादी 49.7 प्रतिशत है. ईसाई और इस्लाम को मानने वालों की आबादी भी करीब-करीब इतनी ही है. यहां ईसाई 21.5 और मुस्लिम 28.5 प्रतिशत हैं. खास बात ये है कि इस सीट की हिंदू आबादी में दलितों की खासी आबादी है. कुल वोटरों की तादाद 13 लाख, 25 हजार 788 है.

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