देहरादून , उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में बसे केदारनाथ मंदिर के कपाट गुरुवार को तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिए गए।धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर में शिव की मूर्ति की स्थापना की गई और भोर में 5.35 बजे भक्तों के लिए मंदिर का दरवाजा खोल दिया गया।

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष मोहनलाल थपियाल ने बताया कि, आदिशंकराचार्य द्वारा बनाए गए 1,200 साल पुराने मंदिर की साज-सज्जा करीब 10 क्विंटल फूलों से की गई है। ये फूल ऋषिकेश के एक एनजीओ ने मुफ्त में मंदिर को उपलब्ध कराए थे।

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ मंदिर में प्रवेश किया और आदियोगी से प्रार्थना की। 

मंदाकिनी नदी और सरस्वती नदी के तट पर बना केदारनाथ मंदिर गढ़वाल क्षेत्र में बने पंच केदार – (भगवान शिव के पांच मंदिर) में से एक है।

सरकार ने रुद्रप्रयाग जिले में 11,755 फीट की ऊंचाई पर बसे केदारनाथ क्षेत्र में बर्फबारी से जमी 15-20 फीट को हटाने और ध्वस्त हुई झोपड़ियों के पुनर्निमाण के काम का जिम्मा लिया था। 

सरकार ने करीब 3000 तीर्थयात्रियों के लिए रात में ठहरने का इंतजाम करने के लिए टेंट बनवाए और ध्वस्त झोपड़ियों को ठीक कराया।

ज्यादातर बर्फ पिघल चुकी है, लेकिन मंदिर व आसपास के पहाड़ों की चोटियां अभी भी बर्फ की मोटी चादरों से ढकी हैं।

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