एईएस से बचने के लिए जागरूकता जरूरी : नीतीश

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पटना, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से हो रही बच्चों की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सोमवार को कहा कि इसके लिए जागरूकता अभियान की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रभावित गांवों में आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में कहा, “यह बीमारी काफी सालों से इस क्षेत्र में प्रयेक वर्ष गर्मी के मौसम में आती है। वर्ष 2015 से ही इस मामले में कई अनुसंधान किए जा रहे हैं। सभी विशेषज्ञों की राय अलग-अलग रही है।”

उन्होंने कहा, “चमकी बुखार को लेकर जागरूकता अभियान की जरूरत है। मैंने खुद भी मुजफ्फरपुर जाकर श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में पीड़ितों से मुलाकात की है। पीड़ित लोगों में ज्यादा लड़कियां हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं।”

उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रभावित गांवों में आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे ऐसे लोगों के जीवनस्तर को ऊपर उठाया जा सके। उन्होंने एसकेएमसीएस को 2,500 बेड का अस्पताल करने की भी घोषणा की। 

मुख्यमंत्री के पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा, “इस बीमारी से पीड़ित लोगों में कमी आ रही है। वर्ष 2013 में इस बीमारी से जहां 222 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2014 में 379 लोगों की मौत हुई थी। लेकिन इस वर्ष 28 जून तक 154 लोगों की मौत हुई है। सभी तरह के आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “चमकी बुखार का प्रकोप 1995 से है। देश दुनिया के कई बड़े अस्पतालों के द्वारा इस बीमारी को लेकर रिसर्च किया गया है। रिसर्च में यह भी बताया गया है कि इस बार बच्चों की मुत्यु दर में कमी आई है।”

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “बीमारी से जागरूकता के लिए पुस्तिका का वितरण किया गया। लीची पैदावार वाले जिले के लिए 18 लाख पैंपलेट, ओआरएस के पैकेट भी बांटे गए। इसको लेकर सोशल मीडिया, फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से प्रचार भी किया गया है।”

इससे पहले विधानमंडल के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही प्रारंभ होने से पहले सदन के बाहर और कार्यवाही प्रारंभ होने के बाद सदन के भीतर विपक्षी दलों ने एईएस को लेकर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। 

इस दौरान विपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से इस्तीफे की मांग की और सदन में कार्यस्थगन का प्रस्ताव दिया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने मंजूर कर लिया। 

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